अभी तक कुंभ को लेकर कोई नोटिफिकेशन नहीं

हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार)। उत्तराखंड सरकार ने एक जनवरी को हरिद्वार कुंभ मेले का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। इस कारण 14 जनवरी को होने वाला मकर संक्रांति का स्नान कुंभ मेले का हिस्सा नहीं होगा। यह हर वर्ष की भांति सामान्य स्नान पर्व के तौर पर ही आयोजित होगा।
मकर संक्रांति व वसंत पंचमी इस दौरान पड़ने वाले कुंभ के अन्य पर्व स्नान भी हरिद्वार कुंभ का हिस्सा न होकर हर वर्ष की तरह होने वाले सामान्य स्नान पर्व ही होंगे।
राज्य सरकार ने एक जनवरी को कुंभ को लेकर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया।
इससे राज्य सरकार के हरिद्वार कुंभ मेला अवधि को घटाने की संभावना बढ़ गई है। आमतौर पर हर कुंभ में मकर संक्रांति स्नान कुंभ स्नान का हिस्सा होता है और इसे कुंभ मेला पर्व स्नान का दर्जा हासिल रहता है। इसके चलते कुंभ मेला आयोजित करने वाली राज्य सरकार आमतौर पर कुंभ मेला वर्ष में एक जनवरी को कुंभ मेले का नोटिफिकेशन जारी कर देती थी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और हरकी पैड़ी की प्रबंध कार्यकारिणी संस्था श्रीगंगा सभा के समन्वय से सरकार ने पिछले वर्ष कुंभ मेला के शाही और पर्व स्नान की घोषणा की गई थी । तो मकर संक्रांति स्नान को कुंभ मेला का पहला पर्व स्नान घोषित किया था। उस वक्त कुंभ में छह पर्व और चार शाही स्नान को कुंभ का हिस्सा बताया गया था। हरिद्वार कुंभ का पहला शाही स्नान 11 मार्च महाशिवरात्रि को होना निश्चित हुआ है। जबकि कुंभ के लिए होने वाला विशेष नक्षत्रीय संयोग अप्रैल में स्थापित हो रहा है। इस लिहाज से कुंभ के पावन पर्व की विशेष अवधि महज 15 दिन की ही है। इस लिहाज से पहला शाही स्नान कुंभ के निमित्त इस विशेष नक्षत्रीय संयोग की स्थापना से काफी पहले 11 मार्च को बिना कुंभीय नक्षत्र संयोग के ही हो जाएगा। बताया जा रहा है कि इन्हीं सब बातों और कोविड-19 संक्रमण के कारण राज्य सरकार ने एक जनवरी को कुंभ को लेकर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। कहा जा रहा है कि कुंभ का नोटिफिकेशन अब 20 फरवरी को अखाड़ा परिषद की राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक के बाद जारी किया जाएगा और उस वक्त ही कुंभ के स्वरूप का निर्धारण भी किया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो कुंभ मेले का नोटिफिकेशन जारी न होने के कारण मकर संक्रांति स्नान के साथ ही वसंत पंचमी व इस दौरान पड़ने वाले कुंभ के अन्य पर्व स्नान भी हरिद्वार कुंभ का हिस्सा न होकर हर वर्ष की तरह होने वाले सामान्य स्नान पर्व ही होंगे। कुंभ मेला अधिष्ठान मकर संक्रांति स्नान को कुंभ के ट्रायल के तौर पर अपनी तैयारियों को परखेगा।




