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माहे रमज़ान मे कसरत से हो रही क़ुरआन मजीद की तिलावत

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माहे रमज़ान मे क़ुरआन ए पाक की तिलावत को लेकर नहजुल बलाग़ा में खुतबा ११० मे तिलावते क़ुरआन के मुताल्लिक़ अमीरुलमोमेनीन (अ०स०) का एक खूबसूरत बयान भी मिलता है। आप फरमाते हैं की क़ुरआन मजीद का इल्म हासिल करो के यह बेहतरीन कलाम है और इसमे ग़ौर ओ फिक्र करो के यह दिलों की बहार है।
इसके नूर से शिफा हासिल करो के यह दिलों के लिए शिफा है और इस की बाक़ायदा तिलावत करो के यह मुफीद तरीन क़िस्सों का मरकज़ है।उक्त पंक्ति की ओर इशारा करते हुए धार्मिक संस्था उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने बताया की यही वजहा है माहे रमज़ान मे लोग कसरत से क़ुरआन मजीद की तिलावत कर अपने गुनाहो से तौबा और अपने वालीदैन की मग़फिरत की दुआ शिद्दत से कर रहे हैं।माहे रमज़ान के सातवें रोज़े की आमद सहरी करने के बाद से दिन भर लोग अपने माबूद की रज़ा की खातिर जहाँ पाँचो वक़्त की नमाज़ को अहमियत दे रहे हैं वहीं सभी घरेलछ कामो से फारिग़ हो कर तिलावते कलाम ए पाक पढ़ने के साथ क़ुरआन की आयतों का तरजुमा पढ़ कर फैज़ भी हासिल कर रहे हैं।माहे रमज़ान मे हर एक शख्स कोरोना वबा के बीच खुदा की इबादत मे मशग़ूल है अल्लाह और पैग़म्बर ए इसलाम की सुन्नत पर अमल भी कर रहा है और देश दुनिया मे फैली मुज़ी वबा के जल्द से जल्द खात्मे की दूआ भी कर रहा।मस्जिदों मे भी मात्र पाँच लोगों की मौजूदगी मे नमाज़ अदा करने के बाद पेशइमाम द्वारा दुआ ए खैर हो रही है।

फेसबुक, ट्यूटर, वाट्सएप से शेयर हो रही क़ुरआन मे दर्ज अच्छी बातें

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी ने बताया की इस आधुनिक दौर मे मोबाईल के ज़रीये लोगों की खैरो आफियत लेने के साथ एक दूसरे को सेहत ,सलामती,रिज़्क़ मे बरकत,वबा के खात्मे के साथ माहे रमज़ान के एक एक दिन की खास दूआएँ भी वाट्सएप, फेसबुक और दूसरे संचार माध्यमों के द्वारा भी भेज कर एक से दूसरे को फारवर्ड कर सवाब मे शामिल होने की अपील भी की जा रही है।

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