मजदूर दिवस : रोटी कपड़ा और मकान मांग रहा मजदूर

( ज्योति श्रीवास्तव )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मई माह की 1 तारीख मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है मार्क्स का नारा दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ जिससे दुनिया भर के मजदूरों को वैश्विक पहचान मिली 5 मई 1818 में जर्मनी में जन्मे मार्क्स ने 19वीं शताब्दी में यह नारा दिया था आज की ग्लोबलाइजेशन की आधुनिक शुरुआत इस घटना को माना जा सकता है यह बात और है कि भारतीय संदर्भ में प्राचीन काल से ही ग्लोबलाइजेशन की बात देखने को मिलती है जब महा उपनिषद में वसुधैव कुटुंबकम का उल्लेख मिलता है भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में यह उद् घोष वाक्य अंकित है वसुधैव कुटुंबकम अर्थात पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है दोनों ही बातें बिल्कुल विपरीत हैं किंतु एक बात समान है कि दोनों ही बातों में विश्व को सामूहिक एकता की ओर अग्रसर करने का संदेश छिपा है पिछले वर्ष से पूरा विश्व जिस अचानक से आई आपदा से जूझ रहा है उस संकट की स्थिति में वैश्विक एकता की आवश्यकता अपरिहार्य है अतः वसुधैव कुटुंबकम और दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ दोनों बातों का सार्थक आशय ग्रहण करके यह कहना होगा कि दुनिया के डॉक्टर एक हो जाओ और वैज्ञानिक भी जुड़ जाओ संघे शक्ति वाले अस्त्र से इस वायरस पर एक साथ प्रहार करो जिससे हमारी दुनिया इस संकट से बाहर निकल आए जिससे लोग पहले की तरह हंसी खुशी पूर्वक रहने लगे। हालांकि मजदूर दिवस पर बात मजदूरों की होनी चाहिए लेकिन यह मामला भी मजदूरों से बहुत अधिक जुड़ा हुआ है हम अभी पिछले वर्ष की वह भयानक तस्वीरें भुला नहीं सकते जब न जाने कितने मजदूर अपने घरों को पैदल ही निकल पड़े थे। लॉकडाउन के बाद अतः यह बात भी मजदूरों से जुड़ ही जाती है 2 जून की रोटी के लिए अपने गांव घर से दूर बड़े शहरों में बसे हुए मजदूरों ने किस तरह पलायन किया था यहां पर हमने मजदूर दिवस पर मजदूरों के सम्मान के लिए और वर्तमान में आए हुए संकट के निदान के लिए अपनी बात रखने की कोशिश की है वैसे मजदूरों की सार्वभौमिक व्यथा को दर्शाते हुए नीचे कुछ पंक्तियों में बयान करने का प्रयास किया है। शहर की गगनचुंबी अट्टालिकाओं को निहारता मजदूर मन ही मन सोचता है। मालिक से इन कंक्रीट प्रासादों की एक तस्वीर मांग लूँ। तथाकथित घर में मेज के सहारे एक तरफ टिका कर रख दूंगा टपकती छत से परेशान बच्चों को दिलासा दूंगा यह तस्वीर दिखा कर देखो इनकी बुनियादों में मेरे श्रम के मोती टके हैं। यह बात और है इसमें रहता कोई और है।

