देवों की दीपावली है कार्तिक पूर्णिमा,जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। पुराणों के अनुसार देवता अपनी दीपावली कार्तिक पूर्णिमा की रात को ही मनाते हैं। आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक” ने बताया कि यह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है कार्तिक पूर्णिमा इस दिन काशी में धूम रहती है बाबा विश्वनाथ जी एवं माँ गंगा दीपों से सजी रहती हैं।कार्तिक पूर्णिमा में स्नान और दान का अधिक महत्व है।इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान को भी विशेष महत्व दिया गया है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है एवं पितरों को प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर 2021 शुक्रवार को मनाई जाएगी।पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर गुरुवार को दिन- 11:38 मि. से प्रारंभ होकर 19 नवंबर शुक्रवार को दिन – 01:24 मि. तक है।
इस पुर्णिमा की मान्यता उदया तिथि अनुसार मानी गई है और उदया तिथि वाली ही पूर्णिमा ग्रहण की जाती है इसलिए इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 19 नवम्बर 2021 शुक्रवार को मनाई जाएगी।
*कार्तिक पूर्णिमा का महत्व*
पुराणों के अनुसार भगवान शिव जी ने कार्तिक पूर्णिमा को ही त्रिपुरारी का अवतार लिया था और इस दिन को त्रिपुरासुर के नाम से विख्यात असुर भाइयों की एक तिकड़ी को मार दिया था यही कारण है कि इस पूर्णिमा का एक नाम त्रिपुरी पूर्णिमा भी है।
असुरों का संहार कर अत्याचार को समाप्त कर भगवान शिव जी ने त्रैलोक्य में सुख शांति स्थापित किया इसलिए देवताओं ने राक्षसों पर भगवान शिव जी की विजय के लिए अपनी श्रद्धा भाव अर्पित करने के लिए इस दिन दीपावली मनाई थी कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव जी की विजय के उपलक्ष्य में काशी (वाराणसी) के पवित्र शहर में भक्त गंगा के घाटों तथा अन्य तीर्थों,मंदिरों एवं घरों में दीपक जलाकर दीप मालिकाओं से सजाकर देव दीपावली मनाते हैं। इसी दिन भगवान श्री विष्णु जी ने मत्स्यावतार धारण किया था।
इस दिन ही रास यात्रा त्रिपुरोत्सव पुष्कर में उत्सव एवं दीपदान कार्तिकेय जी का दर्शन तथा गुरुनानक जयंती, जैनियों का महावीर रथोत्सव भी मनाया जाता है।



