लचर व्यवस्था, दूरदर्शिता का अभाव,और अकर्मण्यता के कारण ही महामारी ग्रामीण क्षेत्रो में फैली- सुशील तिवारी

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस (किसान)के उपाध्यक्ष व कार्यक्रम क्रियान्वयन व प्रचार प्रसार प्रभारी सुशील तिवारी ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था, दूरदर्शिता का अभाव और अकर्मण्यता का ही परिणाम है कि महामारी का प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों में निरन्तर पैर पसार रहा है ,और आने वाले समय में हालात बद से बदतर होने की आंशका से इन्कार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों का यह दुर्भाग्य है कि यहां पर सरकार ने कोरोना की पहली लहर से कोई सबक नहीं लिया।अब सरकार कोरोना की दूसरी लहर के कारण पूरी तरह विवश और लाचार नजर आने लगी है।प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई है। आक्सीजन, दवाइयों और बेड की सुचारू व्यवस्था न होने के कारण प्रदेश के लोगों को लोगों को अपरिहार्य परिस्थितियों का सामना करने के साथ साथ डाक्टरों को भी इसकी विभीषिका का सामना करना पड़ रहा है। तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार केवल झूठा श्रेय लेने में माहिर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में आक्सीजन की कमी और दवाइयों की कालाबाजारी ने सरकार की लचर व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है।पूरे प्रयागराज मंडल विशेष तौर पर यमुनापार क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम भेज कर सर्वेक्षण करवा कर इलाज की तुरंत व्यवस्था की जाए अन्यथा आने वाले समय में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।उन्होंने मांग की है कि प्रदेश में सभी विपक्षी पार्टियों के नेताओं की तुरंत ही बैठक बुलाकर उनको विश्वास में लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लेकर हालात पर काबू पाने के लिए मिलजूल कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए। केवल विज्ञापन देकर यह जंग नहीं जीती जा सकती है। इस गलतफहमी को मुख्यमंत्री जितनी जल्दी निकाल देंगे उतना ही यह प्रदेश के लोगों के लिए लाभकारी होगा।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आम जनता की वेदना उच्च न्यायालय,सर्वोच्च न्यायालय से देखी नहीं गई और उन्हें भी इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ रहा है,लेकिन व्यवस्था है कि सुधरने का नाम नही ले रही ,
समचार पत्रों और सरकारी आंकड़ों की तुलना करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि प्रयागराज के एक लोकप्रिय समचार पत्र ने विगत दिनों खबर प्रकाशित की थी कि अप्रैल माह में ही शहर के घाटों पर 6 हज़ार से ज्यादा लोगो की अंत्येष्टि की जा चुकी है जबकि सरकारी आंकड़े 315 मौत ही महामारी से बता रहे हैं।




