Latest

फीस वृद्धि के छात्र विरोधी फैसले को तत्काल वापस ले विवि प्रशासन

 

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मोदी सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर जीडीपी का 6 फीसदी खर्च करने का लक्ष्य घोषित किया गया है। अगर इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मोदी सरकार ईमानदार है तब उसे विश्वविद्यालयों को अपना खर्च चलाने के लिए खुद संसाधन जुटाने पर जोर देने का औचित्य समझ से परे है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालय द्वारा अपने खर्च के लिए खुद संसाधन जुटाने के निर्देश के आधार पर इविवि कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव द्वारा फीस वृद्धि के छात्र विरोधी फैसले को वाजिब ठहराने को स्वीकार्य नहीं किया जा सकता है। दरअसल विवि प्रशासन की कवायद मोदी सरकार की दिशा के अनुरूप शिक्षा को कारपोरेट्स की मुनाफाखोरी व लूट के लिए बाजार के हवाले करने की है। उदाहरण देते हुए बताया गया कि इसी तरह की नीति का दुष्परिणाम स्वरूप आईआईटी व आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में विगत दो दशकों में ग्रामीण व मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि के छात्रों की संख्या अप्रत्याशित रूप से गिरावट आई है।विकसित मुल्कों के माडल को हूबहू अपने देश में लागू नहीं किया जा सकता है। उन देशों में छात्रों को फैलोशिप व बेरोजगारी भत्ता से उन्हें सामाजिक सुरक्षा हासिल है जोकि हमारे देश में है ही नहीं। ऐसे में फीस वृद्धि और बाजारीकरण का सर्वाधिक खामियाजा कमजोर व मध्य वर्गीय तबकों को भुगतना पड़ेगा।

Related Articles

Back to top button