लाइंसेस मिला नहीं, आ गया रिटायरमेंट का फरमान

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। भारत पंप्स एंड कंप्रेशर लिमिटेड (बीपीसीएल) को प्रदेश सरकार से दिए गए ढाई हजार आक्सीजन सिलिंडर के आर्डर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बीपीसीएल से ढाई हजार आक्सीजन सिलिंडरों की सप्लाई पर संकट
इन सिलिंडरों की सप्लाई 21 दिन के भीतर शुरू हो जानी थी। आर्डर मिले 19 दिन बीत गए लेकिन कपंनी को सिलिंडर बनाने का लाइसेंस ही नहीं मिला है। इसी बीच कंपनी के कर्मचारियों को रिटायर करने का आदेश आ गया। इससे सिलिंडर निर्माण के कार्य को झटका लगा है। अगर रिटायरमेंट का आर्डर न रुका तो सिलिंडरों की सप्लाई मुश्किल हो जाएगी।
कोरोना की आपदा में आक्सीजन की कमी से लोग दम तोडऩे लगे तो औद्योगिक क्षेत्र नैनी स्थित बंद कंपनी बीपीसीएल को शुरू करवाया गया। सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी में 2012 से आक्सीजन सिलिंडरों बनाने का काम बंद था। इसे भारत सरकार ने दिसंबर में पूरी तरह से बंद कर दिया था और कर्मचारियों को रिटायर करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी बीच कोरोना की आपदा आई तो बंद पड़े सिलिंडर प्लांट को चलाने के लिए प्रदेश सरकार के अनुरोध पर भारी उद्योग मंत्रालय ने अनुमति दे दी। प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल को ढाई हजार सिलिंडरों का आर्डर दे दिया था। 3.68 करोड़ रुपये भी जारी करते हुए सप्लाई 21 दिनों में करने को कहा गया।
आर्डर मिलने के बाद रिटायर होने से बचे 140 कर्मचारी काम करने लगे। लेकिन अब कर्मियों को भारी उद्योग मंत्रालय से 20 मई तक रिटायर करने का आदेश आ गया। आदेश आते ही कर्मचारियों का उत्साह ठंडा पड़ गया और सब काम ठप।
रिटायरमेंट के आदेश के बाद कर्मचारियों ने अफसरों और मंत्रियों से अनुरोध किया उन्हें तीन महीने तक रहने दिया जाय तो वह प्रदेश सरकार से जो आर्डर मिला है, उसे पूरा कर देेंगे। अगर 20 मई तक रिटायर कर दिए गए तो फिर वह काम नहीं करेंगे और न काम करने देेंगे।
कमिश्नर संजय गोयल का कहना है कि कोरोना संकट के दौर में आक्सीजन सिलिंडर की जरूरत थी तो काफी प्रयास करके बीपीसीएल को चलवाया गया था। अभी भी प्रयास जारी है कि जो आर्डर मिला है उसे पूरा करवाया जाय। कंपनी प्रबंधन से बातचीत चल रही है। इसमें बीच का कोई रास्ता निकाला जाएगा।



