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राधेश्याम त्रिवेदी एक दौर में ऐसे इंस्पेक्टर थे, जिनका नाम सुनते ही अपराधी थर्रा उठते थे

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। नाम सुनते ही अपराधियों के होश उड़ जाते थे।वह समय था जब 90 के दशक में अपराधियों के लिए काल रहे एनकाउंटर मास्टर राधेश्याम त्रिवेदी जीता आज उनके पैतृक निवास पर निधन हो गया। शनिवार को उन्होंने सीतापुर जिला स्थित अपने गांव में अंतिम सांसें लीं।

 

राधेश्याम त्रिवेदी लंबी बीमारी के बाद आज उनका निधन हो गया

 

हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। 71 वर्षीय राधेश्याम त्रिवेदी कुछ दिनों से बीमार थे। उनकी मौत की खबर मिलते ही पुलिस महकमे में मातम छा गया। पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राधेश्याम त्रिवेदी एक दौर में ऐसे पुलिस इंस्पेक्टर थे, जिनका नाम सुनते ही अपराधी थर्रा उठते थे। उन्होंने अब तक छप्पन जैसी फिल्मों के किरदार से भी अधिक अपराधियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। 1995 से लेकर एक दशक तक प्रयागराज में उनका बोलबाला था। उनकी तैनाती के दौरान ही पूर्व सांसद अतीक अहमद पर कचहरी में पेशी के दौरान बम से हमला हुआ था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में अतीक पर ही साजिश रचने का आरोप लगाया था लेकिन भीड़ ने चारों तरफ तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। अतीक के गुर्गों ने स्वरूपरानी अस्पताल में बवाल कर दिया था। उस वक्त राधेश्याम त्रिवेदी ने मोर्चा संभाला। उनके लाठी चार्ज करते ही उपद्रवियों के होश उड़ गए। कुछ ही देर में स्थिति को उन्होंने सामान्य बना दिया था।

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