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आज के परिवेश में भगवान बुद्ध के संदेशों का अत्यधिक महत्व है

( ज्योति श्रीवास्तव )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। 26 मई को वैशाख पूर्णिमा है ,वैशाख पूर्णिमा को हम बुद्ध जयंती के रूप में भी मनाते हैं पूर्णिमा और गौतम बुद्ध का आपस में विशेष संबंध है ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह मानते हैं की वैशाख पूर्णिमा पर तो बुद्ध का जन्म हुआ और उन्हें उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी पूर्णिमा को ही हुई थी और भगवान बुद्ध ने जब मां वसुंधरे को आखिरी नमन किया था वह तिथि भी पूर्णिमा की ही थी जिसे हम महापरिनिर्वाण के नाम से जानते हैं। भारत की भूमि रतनगर्भा है मां भारती ने ऐसे ऐसे रत्न सपूतों को जन्म दिया है जिनके तेज के आगे हजारों कोहिनूर की चमक धूमिल पड़ जाए मां भारती के ऐसे ही तेजोमय संतान के रूप में गौतम बुद्ध का नाम भी आता है गौतम बुद्ध को हम केवल गौतम बुद्ध कर सकते हैं क्योंकि सूर्य सिर्फ सूर्य होता है उसे हम किसी से तुलना नहीं कर सकते ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार 563 ईसा पूर्व लगभग नेपाल के तराई क्षेत्रों में लुंबिनी नामक स्थान पर शाक्य राजा शुद्धोधन की पत्नी महामाया ने एक बालक को जन्म दिया जिसका नाम सिद्धार्थ रखा गया इतिहास में एक प्रसंग आता है की सिद्धार्थ के जन्म के समय राजा ने बालक के भविष्य के बारे में जानने के लिए ज्योतिषी से पूछा तब उन्होंने बताया की यह बालक या तो बहुत बड़ा सम्राट बनेगा या बहुत बड़ा सन्यासी पिता शुद्धोधन को यह बात चिंतित करने लगी अतः उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ को सदैव ही सुख एवं वैभव में रखा किशोरावस्था में ही अत्यंत ही सुंदर राजकुमारी यशोधरा से उनका विवाह करा दिया और राजकुमार सिद्धार्थ एवं यशोधरा का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम राहुल था किंतु हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है

होतब्यता बलयसि
एक बार राजकुमार सिद्धार्थ महल से बाहर घूमने निकले और उन्होंने सांसारिक दुखों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनका मन विकल होता की दुनिया में इतने दुख हैं अब उनका मन महल के वैभव में और सुख में नहीं लग रहा था एक दिन रात के समय वे अपनी पत्नी यशोधरा और छोटे से पुत्र राहुल को छोड़कर महल से निकल गए इसी प्रसंग में यशोधरा के अत्यधिक दुख को दर्शाते हुए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने कहा है सखि वे मुझसे कहकर जाते। किंतु परिस्थितियां तो सिद्धार्थ को तथागत और बुद्ध बनाने वाली थी और दुनिया के दुख को दूर करने के लिए उनसे मार्ग निकलवाने वाली थी अतः बुद्ध शांति की खोज में निकल पड़े वर्षों वर्षों भटकने के बाद गया नामक स्थान पर वट वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बोधिसत्व कहलाए अपने ज्ञान का प्रथम प्रवचन उन्होंने अपने पांच शिष्यों को काशी में सारनाथ नामक स्थान पर दिया जो आज भी वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में है और बौद्ध धर्म वालों का प्रमुख धार्मिक स्थल है आज के परिवेश में भगवान बुद्ध के संदेशों का अत्यधिक महत्व है बुद्ध कहते हैं स्वयं अपनी शरण में जाओ किसी और के नहीं इस वाक्य में यह संदेश है हमें आत्मनिर्भरता और आत्म विश्वास से भरा होना चाहिए स्वयं पर विश्वास रखना चाहिए बुद्ध कहते हैं सर्वप्रथम अपना महत्व समझिए संसार का महत्व अपने आप समझ आ जाएगा तथागत हमें स्वयं से प्रेम करने को कहते हैं इसका अर्थ या नहीं कि हम स्वार्थी एवं आत्म केंद्रित हो जाए अपितु इसका संदेश यह है की स्वयं से प्रेम करने वाला व्यक्ति ही परिवार और समाज से प्रेम कर सकता है यहां पर प्रेम एक वृहद विचार के रूप में प्रयुक्त हुआ है गौतम बुध का संदेश सकारात्मक विचारों की पराकाष्ठा है जब वे कहते हैं कि दुख और धोखा भी हमें कुछ ना कुछ सिखा जाता है तथागत का यह विचार कि हमारे विचार ही हमारे जीवन की पूरी रूपरेखा तैयार करते हैं 100% सत्य है तभी तो हमारे आसपास ही एक सामान्य सा मनुष्य धीरूभाई अंबानी जैसा उद्योगपति बन जाता है इधर 17 -18 महीनों से देश दुनिया व्यक्ति समाज परिवार सभी मुश्किलों से जूझ रहे हैं अचानक से एक जैविक आपदा आन पड़ी है ऐसे में बौद्ध संदेश और भी प्रासंगिक है तथागत कहते हैं हमें समस्याओं से सीखना पड़ेगा हमें खुशी की खोज नहीं बल्कि खुशी के मार्ग पर चलना ही है खुशी स्वयं एक मार्ग है ऐसे में शांति सुख सब हमारे अंदर ही है इसके लिए हमें कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है हमारी चारों तरफ जो संघर्ष दिखाई पड़ता है उसे तथागत का एक संदेश दूर कर सकता है कि नफरत को नफरत से नहीं बल्कि प्रेम से जीता जा सकता है द्वेष घृणा और भी अन्य मानसिक विकार हमारे प्रगति के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न करते हैं हमें इनसे ऊपर उठना होगा गौतम बुद्ध सत्य को सूर्य और चंद्रमा की तरह देखते हैं वह कहते हैं सूर्य चंद्रमा और सत्य तीनों ही कभी छुपता नहीं तथागत का एक संदेश और भी है भविष्य के सपने मत देखो अतीत में मत उलझो सिर्फ वर्तमान का सही उपयोग करो भविष्य स्वयं सवंर जाएगा और अतीत पर हमारा कोई वश नहीं होता वे कहते हैं हर सुबह हमारा नया जन्म होता है अतः हमें सुबह जागने के बाद पूरे दिन का सार्थक सदुपयोग करना चाहिए मानवीय दुर्गुणों पर प्रहार करते हुए तथागत कहते हैं हमें आपसे रिश्तो में शक की भावना नहीं लानी चाहिए यह रिश्तो को दीमक की तरह चाट जाती है गौतम बुध का कहना है यदि हम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लें तभी दूसरों पर विजय पा सकते हैं वे कहते हैं ताकत की आवश्यकता बुरे काम के लिए पड़ती है अन्यथा प्रेम से सारी सृष्टि को जीता जा सकता है

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