साधन चतुष्टय की सिद्धि ही कथा की फ़लश्रुति है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी

(विनय मिश्रा) हरिद्वार (अनुराग दर्शन समाचार )। कुम्भ नगरी हरिद्वार में जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि जी महाराज के श्रीमुख से श्री हरिहर आश्रम, कनखल, हरिद्वार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का ‘षष्ठम दिवस’ सम्पन्न हुआ।कथा के प्रारम्भ में पूज्य आचार्यश्री जी कहते हैं कि नन्द-उत्सव का वर्णन करते हुए पूज्य “आचार्यश्री” जी कहते हैं कि नन्द के घर बालक नही, अपितु मूर्तिमान आनन्द का प्रादुर्भाव हुआ। उत्सव वह है जहाँ उच्चता का प्रसव हो।
साधन चतुष्टय की सिद्धि ही कथा की फ़लश्रुति है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी
जो दूसरों के आनन्द का कारण बने वही ‘नन्द’ है तथा जो सबको यश व शुभ कर्मों का श्रेय देती है, और जिनके सत्कर्मों का गोपन है वो ‘यशोदा’ है। भगवान श्रीकृष्ण के आने से ब्रजवासियों के जीवन स्वतःस्फूर्त आंनद-औदार्य का समावेश हो गया। तदनन्तर गुरुदेव ने भगवान शिव के ब्रज आगमन की कथा श्रवण कराई। कथा के अगले पड़ाव में ‘पूज्यश्री’ जी ने भगवान द्वारा पूतना के उद्धार की लीला सुनाई। पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि पूतना अविद्या का नाम है। इसी क्रम में गुरुदेव ने भगवान भोलेनाथ का आगमन तदनन्तर उनके नामकरण के प्रसंग का श्रवण कराया। उपमेय-उपमानों, प्रतीकों और उद्धरणों का अवलंब लेकर पूज्य गुरुदेव ने भगवान का गोकुल से नन्दगांव जाने का प्रसंग एवं भगवान श्रीकृष्ण की नित्य लीला सहचरी माँ पराम्बा ‘राधिका’ के स्वरूप, उनके प्रकाट्य और महिमा का श्रवण करवाया। माँ राधिका कुछ और नही, अपितु भगवान की निजता-स्वभाव और उनकी अंतःप्रेरणा ही हैं।
इस अवसर प्रभु प्रेमी संघ की अध्यक्षा पूज्या दीदी महामंडलेश्वर स्वामी नैसर्गिका गिरि जी, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी राज राजेश्वरानंद जी, महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अपूर्वानन्द गिरि जी, पूज्य स्वामी सोमदेव गिरि जी, पूज्य स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी, कथा के मुख्य यजमान श्री अशोक डांगी जी, श्रीमती अनीता डांगी जी, संस्था के न्यासी गण एवं बड़ी संख्या में साधक उपस्थित रहे।



