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काशी में पहले भी विकास हुए हैं, पर मन्दिर कभी नहीं तोड़े गये-अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती

वाराणसी। विकास कोई नयी चीज नहीं अपितु एक सतत प्रक्रिया है जो सृष्टि के आरम्भ से ही चली आई है और आज भी अनवरत है ।

वर्तमान सन्दर्भों की अगर बात करें तो भी काशी में ही कई एक विकास के कार्य विगत सौ वर्षों में हुए हैं पर उनमें तो मन्दिर नहीं तोड़े गये । आस्था को चोट नहीं पहुँचाई गयी । फिर क्या कारण है कि आज विकास के नाम पर काशी जैसी धर्मप्राण नगरी में हजारों वर्ष पुराने और आस्था के केन्द्र मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है ? क्या यह कोई नये तरह का विकास है ? या फिर इस विकास के करने वाले के मन मे ही मन्दिर द्रोह है ?

उक्त प्रश्न विगत दो महीने से चल रहे मन्दिर बचाओ आंदोलनम् अगुवाई कर रहे ज्योतिष्पीठाधीश्वर और द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि *दण्डी स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती* ने अपने बारह दिनी उपवास (पराक व्रत) के दूसरे दिन उनके पास आए लोगों को सम्बोधित करते हुए उठाए।

उन्होंने आगे कहा कि काशी में विगत शताब्दी में हुए विकास पर अगर नजर डाली जाए तो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, काशी विद्यापीठ, डीजल इंजन कारखाना, कैण्ट रेलवे स्टेशन, छावनी एरिया, ट्रामा सेण्टर आदि की गिनती की जा सकती है पर इनमें से किसी के निर्माण में मन्दिर नही तोडे गये हैं। वे आज भी इन परिसरों मे यथावत विद्यमान है और उनमें लोग पूजा-अर्चना, उत्सव आदि आयोजन आज भी स्वतन्त्रता से कर पा रहे हैं।
यहाँ तक कि नरिया से महामना पुरी को मुडने वाले चौराहे के बीच केवल एक मन्दिर पडने के कारण का हि वि वि के दो परिसर बन गये पर मन्दिर को एक किलोमीटर करीब का रास्ता दिया गया ।

स्वामिश्रीः ने आगे कहा कि उपर्युक्त स्थानों को ठीक से सर्वे कर हमारे वक्तव्य की पुष्टि की जा सकती है ।

यदि केवल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की ही बात करें तो परिसर के अन्दर स्थित नये एन सी सी कार्यालय के पास गुल्ला बाबा मन्दिर, आई एम एस के अन्दर बाल हनुमान मन्दिर, आर्ट्स फेकेल्टी एम पी थियेटर के पास अकेलवा बाबा, छित्तूपुर गेट के आगे ग्राम देवी का मन्दिर, कम्प्यूटर सेण्टर सेन्ट्रल आफिस के पीछे हनुमान जी और शिव जी का मन्दिर सीरग्राम के देवता करमन वीर बाबा का मन्दिर, टीचर्स फ्लैट के पास जंगमपुर गाँव का डीह बाबा मन्दिर, जोधपुर प्रिन्सिपल कालोनी के अन्दर हनुमान मन्दिर, विश्वेश्वरैया हास्पीटल के पास ग्राम देवता का मन्दिर, एजुकेशन फेकेल्टी कमच्छा में ग्राम देवता का मन्दिर, रणवीर परिसर में सरस्वती जी एवं हनुमान जी के मन्दिर, सी एच एस के अन्दर का हनुमान मन्दिर आदि उदाहरण है। ये सभी मन्दिर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले से ही वहाँ रहे हैं और इन्हें आज भी इनके स्थान पर आदर सहित विराजमान देखा जा सकता है । इसी तरह अन्य स्थानों पर भी देखा जा सकता है ।

अभी अभी ताजा निर्मित ट्रामा सेण्टर में भी सरस्वती देवी का मन्दिर ज्यो का त्यों रखा गया है । इसी तरह सर्वत्र देखा जा सकता है ।

फिर केवल काशी विश्वनाथ कोरिडोर योजना मन्दिरो को तोड़े बिना क्यों नहीं बन सकती है ? ऐसा लगता है कि यह मूल रूप से मन्दिर तोड़ योजना ही है अन्यथा इतना बडा अनर्थ विकास के नाम पर नहीं किया जा सकता था ।

स्वामिश्रीः ने कहा कि शास्त्रों में उल्लेख है कि यदि देवता की पूजा में बाधा उत्त्पन्न कर दी गयी हो तो उपवास किया जाए अन्यथा घोर नरक की प्राप्ति होती है ।

*यदि विप्रस्समुत्सृज्य
देवतार्चनमत्ति वै ।
स याति नरकं घोरं
यावदाचन्द्रतारकम् ।*

इसीलिए हमने उपवास आरम्भ किया है । 12 दिन के इस व्रत को पराक व्रत कहा जाता है जो सब दोषों का शमन करता है।

*यतात्मनोऽप्रमत्तस्य द्वादशाहमभोजनम् ।*
*पराको नामकृच्छ्रोऽयम् सर्वपापापनोदनः ।।*

हम सनातनधर्मी शास्त्रों के अनुसार अपना जीवन चलाने का प्रयत्न करते हैं इसलिए 12 दिनों तक चलने वाला *पराक व्रत* हमने आरम्भ किया है । इस के अनुसार हम बारह दिनों तक केवल जल लेकर निर्वाह करेंगे । आवश्यकता पर औषधि अपवाद होगी ।

हमें आशा है कि हमारे वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री और कोरीडोर (मूर्ति तोड) योजना के शिल्पकार नरेन्द्र मोदी जी अपने अपने आगामी 14-15 जुलाई के काशी आगमन में काशी की जनता को आश्वस्त करेंगे कि कोई भी मूर्ति और मन्दिर नहीं तोडा जाएगा और तोड़े गये मन्दिर पुनः स्वस्थान निर्मित किये जाएंगे ।

यदि ऐसा होता है तो हम काशीवासी उनकी इस घोषणा का स्वागत करेंगे । यदि उन्होंने कुछ नहीं कहा तो 15 जुलाई को मध्याह्न में हम आन्दोलनम् के चौथे चरण की घोषित करेंगे ।

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