अभ्यर्थियों ने लोक सेवा आयोग पर क्रमिक अनशन किया

474 अभ्यर्थियों की फाइलें लोक सेवा आयोग ने रोका
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा 29 जुलाई 2018 को हिंदी एलटी जीआईसी परीक्षा आयोजित हुई।जिसका परीक्षा परिणाम 28 सितंबर 2020 को प्राप्त हुआ। एवं जिसका सत्यापन 5 नवंबर 2020 को हुआ। प्रमुख मुद्दा-हिंदी एलटी जीआईसी में टोटल 1433 अभ्यर्थी चयनित हुए। जिसमें 474 अभ्यर्थियों की फाइलें इसलिए लिए रोक दी गई । क्योंकि वह ग्रेजुएशन में संस्कृत की योग्यता तो धारण करते थे। परंतु इंटर संस्कृत की योग्यता नहीं धारण करते किंतु एनसीटीई जो पूरे देश में हाईस्कूल सहायक अध्यापक बनने के लिए जो योग्यता निर्धारित करती है । जिसे हम चयनित हिंदी एलटी जीआइसी अभ्यर्थी पूर्ण करते
केवीएस और नवोदय में जो योग्यता होती है और पूरे देश के लिए सहायक अध्यापक बनने के लिए जो योग्यता है वह हिंदी एलटी जी आई सी के 474 अभ्यर्थी धारण करते हैं। योग्यता धारण करते हुए भी इन अभ्यर्थियों की फाइलें लोक सेवा आयोग रोक रखा है। लोक सेवा आयोग के जिम्मेदार अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने के बाद भी यह अपनी निरंकुशता और हठधर्मिता के कारण हम लोगों के मुद्दे को संज्ञान में नहीं ले रहा हैं
जिससे हम प्रतियोगी छात्र मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं और लोक सेवा आयोग पर क्रमिक अनशन करने के लिए बाध्य हुए हैं अनशन करने का कारण यह है कि हमारे साथ हिंदी एलटी जीआईसी परीक्षा देने वाले और रिजल्ट प्राप्त करने वाले तथा सत्यापन कराने वाले प्रतियोगी छात्रों का पोर्टल खुलने वाला है और उनको नियुक्ति मिलने वाली है । तो क्या इन 474 अभ्यर्थियों की इंटर संस्कृत योग्यता ना होने के कारण जबकि ग्रेजुएशन में संस्कृत है जो कि एक उच्च योग्यता है तब भी हम प्रतियोगी छात्र लोक सेवा आयोग बार बार अनशन कर मजबूर है। किंतु लोक सेवा आयोग बार बार आश्वासन देकर भी हमारे मुद्दे पर निर्णय नहीं ले रहा है।जबकि कला विषय में उन्होंने 86 अभ्यर्थियों की रुकी हुई फाइलें एनसीटीई की योग्यता के आधार पर ही अभी 1 हफ्ते के अंदर भेजी है। इसी प्रकार जब हम भी एनसीटीई के अनुसार सही है तो हम अभ्यर्थियों की मांग है कि हमारी भी फाइलें निदेशालय भेजी जाए। पवन राय , नागेंद्र प्रसाद , दिलीप बर्नवाल ,मंजू देवी , प्रीति पांडेय , टॉपर महेंद्र शर्मा



