डेढ़ घंटे की परीक्षा में छह प्रश्नों के देने होंगे उत्तर
पीआरएसयू: परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया अहम निर्णय
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय ने स्नातक अंतिम वर्ष और परास्नातक अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इस बार प्रश्नों की संख्या आधी कर दी गई है। छात्रों को 3 घंटे के बजाय डेढ़ घंटे में ऑफलाइन मोड में परीक्षा देनी होगी। स्नातक एवं परास्नातक के छात्रों को कुल छह प्रश्नों उत्तर देने होंगे। यह निर्णय मंगलवार को कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्रों को परीक्षा नहीं देनी होगी। इनको पिछले सत्र में हुई परीक्षा के आधार पर अंक दे दिया जाएगा।
कुलपति ने बताया कि परास्नातक की परीक्षाएं तीन घंटे की जगह डेढ़ घंटे की होगी। प्रत्येक खंड में पुराने पद्धति के अनुसार दिए जाने वाले उत्तरों की संख्या आधी हो जाएगी। प्रथम खंड में आठ के बजाय चार और द्वितीय खंड में दो के बजाय एक और तृतीय खंड से दो प्रश्नों के बजाय एक ही प्रश्न का उत्तर देना होगा। स्नातक परीक्षा प्रणाली का सरलीकरण करते हुए परीक्षा समिति ने एक विषय के सभी प्रश्नपत्रों को न्यूनतम दो एवं अधिकतम तीन प्रश्न पत्र की सीमा तक को सम्मिलित करते हुए एक ही प्रश्नपत्र तैयार कराने का निर्णय लिया है। तीन खंड में चार-चार सवाल पूछे जाएंगे और दो का जवाब देना होगा। यह परीक्षाएं जुलाई से अगस्त के बीच संपन्न कराई जाएंगी। प्रायोगिक परीक्षाओं में लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर अंक दिया जाएगा।
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में विषम सेमेस्टर सत्र 2020-21 की लिखित परीक्षाएं जो 26 मार्च 2021 तक कराई जा चुकी हैं। मूल्यांकन के बाद प्राप्त अंकों के आधार पर अवशेष प्रायोगिकी परीक्षा के अंकों का निर्धारण होगा। स्नातक द्वितीय एवं चतुर्थ तथा परास्नातक द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों को उनके प्रथम/तृतीय सेमेस्टर के आधार पर अंक निर्धारित कर प्रोन्नत किया जाएगा। सम सेमेस्टर के अन्य पाठ्यक्रमों के सम्बन्ध में भी उनके पूर्व के विषम सेमेस्टर के प्राप्तांकों के आधार पर परीक्षाफल तैयार किया जाएगा। इसके अलावा स्नातक पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में छात्रों को द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत कर दिया जाएगा। वर्ष 2022 मे होने वाली द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष का परिणाम निर्धारित किया जाएगा। सत्र 2020-21 के स्नातक द्वितीय वर्ष के ऐसे छात्र जिन्हें पिछले वर्ष प्रथम वर्ष में प्रोन्नत किया गया था, ऐसे छात्रों को परीक्षा देने के बाद तृतीय वर्ष में प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि, बीकाम द्वितीय वर्ष सत्र 2020-21 की परीक्षा नहीं होगी। क्योंकि बीकाम प्रथम वर्ष सत्र 2019-20 की परीक्षाएं हो चुकी हैं। इस लिहाज से बीकाम द्वितीय वर्ष सत्र 2020-21 के छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रोन्नत कर दिया जाएगा। बीकाम प्रथम वर्ष सत्र 2019-20 के प्राप्तांको के औसत के आधार पर बीकाम द्वितीय वर्ष 2020-21 का परीक्षाफल तैयार किया जायेगा।




