नये टेस्टिंग किट से जल्द हो सकेगी कोरोना की जांच
प्रयागराज। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की अहम वजहों में से एक है जांच में रिपोर्ट आने में देरी और जांच पर होने वाला खर्च।
पर्याप्त टेस्ंिटग किट न होने, महंगी व जांच अवधि में विलंब के कारण कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बरेली का भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) साथ मिलकर प्रेगनेंसी किट की तर्ज पर कोरोना जांच के लिए रैपिड टेस्टिंग किट तैयार करने में जुटे हैं।
इस प्रोजेक्ट के सह अन्वेषक इविवि भौतिकी विभाग के प्रो. केएन उत्तम ने बताया कि कोविड-19 की रैपिड टेस्टिंग किट तैयार करने की प्रक्रिया ट्रायल स्तर पर है।
दोनों संस्थानों ने मिलकर एक साझा प्रोजेक्ट विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली को 30 अप्रैल, 2020 को वित्तीय पोषण हेतु भेजा था। उसने इस परियोजना की उपयुक्तता, गुणवत्ता, उपयोगिता तथा लागत मूल्य का मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञों के पास भेज दिया। साथ ही इससे जुड़े वैज्ञानिकों को इस किट के विकास एवं निर्माण की दिशा में कार्य शुरू करने को कहा।
प्रो. उत्तम ने बताया कि इस कोविड-19 की रैपिड टेस्टिंग किट के मामले में आशा के अनुरूप परीक्षण तथा प्रेक्षण प्राप्त हो रहे हैं। यह टेस्टिंग किट बेहद सस्ती तथा पोर्टेबल यानी वहनीय होगी।
इसे कहीं भी जांच के लिए ले जाया जा सकता है। यह किट लगभग 3 से 5 मिनट में कोरोना के परिणाम बता देगी जबकि इससे जांच पर बैठने वाला खर्च प्रति व्यक्ति 200 से 300 रुपए के बीच होगा।
जांच के प्राप्त परिणाम बाजार में उपस्थित अन्य अमीनो एसिड आधारित मौजूदा जांच के समकक्ष होगा। अमीनो एसिड आधारित मौजूदा जांच अधिक समय लेती है खर्चीली भी है।

