वाह रे समाजवाद वाह!
वाह रे समाजवाद वाह! सोसल मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तेजी से चल रहे बागी बलिया में हाल-फिलहाल जिला पंचायत के चुनाव के परिणाम आने के बाद जिस तरह के दृश्य देखने को मिला हृदय कंपित हो उठा और उसमें अपार वेदना उत्पन्न हो गई। जिस तरह से समाजवादी कारखानों से निकले हुए समाजवादी रणबांकुरों द्वारा एक 90 वर्षीय नारी उपेंद्र तिवारी के मां व अन्य पारिवारिक सदस्यों के सम्मान और अस्मिता को सरेआम तार तार करने का काम किया गया इस कुकृत्य से समाजवाद के पुरोधा डॉ राम मनोहर लोहिया की आत्मा भी कांप उठी होगी। क्या डॉक्टर राम मनोहर लोहिया द्वारा नर-नारी समता नामक पुस्तक में यही लिखा गया था कि राजनीति में किसी मां सदृश बुजुर्ग महिला को खुलेआम यह कहा जाए कि उपेन्द्र तिवारी की मां चू —- गई?क्या इस तरह के नारे समाजवादी प्रशिक्षण शिविर में सिखाया जाता है?इस तरह की भद्दी -भद्दी भाषा का प्रयोग करना तथा अश्लीलता व असंसदीय शब्दों से भरे नारों की प्रासंगिकता धरतीपुत्र कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव ने अपने पूरे कुनबे को सिखा रखा है? समाजवादी रणबांकुरे द्वारा चुनाव जीतने के बाद इस तरह से रौद्र रुप दिखाया गया जैसे सीमा पर दुश्मन देश से लड़ाई जीतने के लिए जा रहे है। यह एक अहम् और विचारणीय सवाल है। क्या मधु लिमए व कर्पूरी ठाकुर ने इसी प्रकार के समाजवाद की कल्पना अपने आने वाले समाजवादी साथियों से कर रखी थी? छोटे लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र के जिला बलिया की राजनीतिक व सामाजिक तानेबाने की तासीर यही है कि एक बृद्ध मां जैसी महिला को मां -बहन किया जाए? क्या जनेश्वर मिश्र का समाजवाद यही है जो एक वृद्ध महिला को सरेआम गालियों के द्वारा ऐसे अलंकृत किया जा रहा है जैसे कि स्व० जनेश्वर मिश्र ने आने वाले तथाकथित समाजवादी नवजवानों को ऐसा ही पहाड़ा सिखाया हो।मै बिल्कुल ही इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता हूँ कि जनेश्वर मिश्र जैसे नायको ने इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया होगा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वह पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का किसी ने इस मुद्दे पर कोई ट्वीट करते देखा? क्या अखिलेश यादव जी अपने कान में ऐसा तेल डाल रखे हैं कि उन्हें अपने रणबांकुरे से निकली हुई सुमधुर ध्वनि सुनाई नहीं पड़ रही है जिससे एक वृद्ध महिला के सम्मान को को सरेआम तार-तार किया जा रहा है वह भी बागी बलिया में? अरे राजनीति का इतना घिनौना व विभत्स चेहरा इस तरह से दिखाई देगा इस बात कि कल्पना स्वप्न में भी डा० लोहिया नही किये होगें। दूषित मानसिकता व समाज मे वर्ग संघर्ष को जन्म देने वाली विचारधारा को समूल नष्ट कर देना चाहिए।ऐसे नारे जिसे मैं लिख नहीं सकता हूं लेकिन वीडियो देखने के बाद वहां उपस्थित समाजवादी रणबांकुरे से पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें भी उनकी मां पैदा की होंगी, उनके पास भी बहन होंगी, उनके पास भी पुत्री होंगी, उनके पास भी पत्नी होगी अगर उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाए तो क्या यह उन्हें अच्छा लगेगा? समाजवादी कारखानों में जहां पर इस प्रकार के नस्ल वाले रणबांकुरें पैदा किए जाते हैं जो दूसरे के मां और बहन को अपनी मां व बहन नही समझते है। यह एक विचारणीय सवाल है कि राजनीति उपेंद्र तिवारी करते हैं, अंबिका चौधरी करते हैं।राजनीति उपेंद्र तिवारी की न मां करती हैं न ही उनकी बहन करती है न बेटी न ही उनकी पत्नी फिर राजनीति का इतना घिनौना चेहरा कि एक बुजुर्ग महिला को भद्दी- भद्दी गालियां दिया जा रहा है और बाद में अंबिका चौधरी व तमाम समाजवादी नेताओं के गुर्गे जोर-जोर से गालियों वह अपने शब्दों के माध्यम से नारे भी लगा रहे हैं और टारगेट में सीधे एक बुजुर्ग महिला रहती है। बलिया का अपना एक बगावती तेवर जरूर रहा है पर गालियां देकर नही। कानून अपना काम करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज देगी पुन: जमानत से छूटकर बाहर आ जाएंगे।अन्य समाजवादी रणबांकुरे उनकी हौसला अफजाई के लिए जेल से छूटने के बाद फूल मालाओं से लादकर उनके किए हुए इस कुकृत्य को सराहना करने के लिए पुनः नारे लगाएंगे। नारों का शब्द क्या होगा यह तो भविष्य के गर्त में है इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते है लेकिन बलिया की सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में यह एक काला अध्याय अवश्य जुड़ गया है जो वहां के सामाजिक व राजनीतिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का काम कर दिया है। कुछ वर्षों पहले भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाती सिंह व उनकी बेटी पर भी इसी तरह की अभद्र व अश्लील टिप्पणी करते हुए बहुजन समाज पार्टी के नेताओं द्वारा सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का कार्य किया गया था।परिणाम क्या हुआ आप सभी जानते है। अखिलेश यादव जी इससे तो पता चलता है कि यदि गलती से भी आपकी पुनः उत्तर प्रदेश में सरकार आ जाती है तो पूरे उत्तर प्रदेश में नंगा नाच व तांडव करने के लिए आपके प्रशिक्षित समाजवादी रणबांकुरे लट्ठ लेकर सड़क पर निकल आएंगे यह अंदेशा तो पूरे देश को बलिया में इस घटित राजनीतिक कलंकित प्रकरण से से हो चला है। अरे कुछ तो शर्म करिए कि आप लोगों ने उपेंद्र तिवारी के मां को गाली नही दिया बल्कि सम्पूर्ण भारतीय महिला समाज को गाली देने का काम किया है। क्या अब सभ्य समाज को यह नारा याद नही कि नारी के सम्मान में सम्पूर्ण समाज मैदान में। अरे हम जिस समाज में रहते हैं यहां नारी को सीता,सती अनुसुइया,सावित्री,दुर्गा,लक्ष्मी सरस्वती,पार्वती के स्वरूप में देखते हैं और उनकी पूजा करते है लेकिन अफसोस यह है कि अखिलेश यादव के रणबांकुरों ने भारतीय सभ्यता व संस्कृति को कलंकित करने का कार्य किया है जिसे किसी भी कीमत पर क्षमा नही किया जा सकता है।अरे हम जिस समाज में रहते है वहां नारी की इज्ज़त व सम्मान करना बचपन से ही सिखाया जाता है परंतु डिंपल यादव(अखिलेश यादव की पत्नी)के मुख से अभी तक कुछ भी नहीं निकला इस तरह के दोगलापन आखिर लाते कहां से हो। चुनाव तो आते जाते है।कोई चुनाव जीतता है तो कोई हारता है पर चुनाव मां-बहन की गालियों की शर्त पर इतिश्री हो यह किसी भी सभ्य समाज के लिए किसी प्रकार से अनुमन्य नही है।



