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30 अक्टूबर से शुरू हो रहा है पुष्य नक्षत्र, जानिए इसके बारे में खास बातें

धर्म डेस्‍क। इस बार 30 अक्टूबर मंगलवार को पुष्य नक्षत्र शाम 5.08 मिनट से शुरू हो जाएगा और अगले पूरे दिन यानी 31 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र रहेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा ने बताया कि 30 तारीख को त्रिपुष्कर योग भी है। इस योगों में खरीदारी करना शुभ रहता है।

इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, जेवर, भूमि, भवन, वाहन आदि खरीदने के लिए शुभ योग है। उन्होंने बताया कि लाभ या शुभ के चौघड़िया में आभूषणों की खरीदारी करना अच्छा माना जाता है। वहीं, वाहन आदि की खरीदारी के लिए चल का चौघड़िया शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में सोने की खरीदारी का अधिक महत्व है। लोग इस दिन सोने इसलिए खरीदते हैं, क्योंकि इसे शुद्ध, पवित्र और अक्षय धातु माना जाता है।

नक्षत्रों का राजा है पुष्य

वहीं, इंदौर के ज्योतिषविद श्रीराम तारलेकर ने बताया कि 31 अक्टूबर की तारीख धातु से संबंधित चीजें जैसे सोना, चांदी, वाहन, मकान आदि के लिए सर्वक्षेष्ठ है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में पुष्य आठवां नक्षत्र होता है। इसे नक्षत्रों का राजा कहा गया है। इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति होने से इसे सभी नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ नक्षत्र माना जाता है।

कहा जाता है कि इस नक्षत्र में किया गया कोई भी काम पुण्यदायी और तुरंत फल देने वाला होता है। यह नक्षत्र स्वास्थ्य के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पुष्य नक्षत्र पर शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर यह सेहत संबंधी कई समस्याओं को समाप्त करने में सक्षम होता है।

उन्होंने बताया कि वार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से गुरु पुष्य, रवि पुष्य, शनि पुष्य, बुध पुष्य जैसे महायोगों का निर्माण होता है, जिनमें खरीदी करने का विशेष महत्व माना गया है। चूंकि पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं और इस बार यह भगवान श्रीगणेश के दिन बुधवार को आ रहा है, इसलिए यह विशेष शुभकारक योग का निर्माण कर रहा है।

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