तीर्थ पुरोहित प्रयागवाल वाहिनी द्वारा लोक कल्याण एवं कोरोना महामारी से मुक्ति के लिये मां गंगा जी का विधि विधान से पूजन एवं महाआरती

मां गंगा की आरती उतारकर लोक कल्याण की कामना की – महंत नरेंद्र गिरि
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। तीर्थ पुरोहित प्रयागवाल वाहिनी द्वारा लोक कल्याण एवं कोरोना महामारी से मुक्ति के लिये आज तीर्थ पुरोहितों द्वारा मां गंगा जी का विधि विधान से पूजन एवं महा आरती की गई. इस कार्यक्रम में अग्रकर्ता मुख्य रूप से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी जी महाराज. स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी टीकरमाफी, वेणी माधव मंदिर के महंत विभूति जी महाराज, मनकामेश्वर मंदिर के महंत स्वामी धरानन्द जी महाराज, रामकृष्ण मिशन मठ के स्वामी करुणानन्द जी महाराज. रुप गौडि़या मठ के महंत अवधूत जी महाराज, सहित सैकड़ों तीर्थ पुरोहितों ने पूजन एवं आरती में भाग लिया. आचार्य पं. दिपेश गौड़ के देखरेख में. वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां गंगा जी का भव्य पूजन आरती किया गया.अध्यक्ष ने नरेन्द्र गिरी जी ने कार्यक्रम की प्रसंशा करते हुए इस प्रकार के आयोजन की सराहना की और आगे भी प्रयागवाल वाहिनी के द्वारा अनवरत होते रहने की शुभकामनाएं दी. वाहिनी के संयोजक श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि यह पूजन एवं महाआरती के द्वारा माँ गंगा जी से विश्व शान्ति एवं कोरोना महामारी से मुक्ति के लिये किया गया जो भविष्य में भी समयानुसार कार्यक्रम होते रहेंगे. तत्पश्चात वाहिनी के अध्यक्ष अमितराज वैद्य ने सभी मुख्य अतिथियओं का अचला ओढ़ा कर सभी पूज्य संतों को अचला ओढ़ाकर अभिनन्दन कर धन्यवाद ज्ञापित किया.उक्त अवसर पर अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी, राष्ट्रीय महासचिव चन्द्रनाथ चकहा मधु जी, प्रयागवाल सभा के पूर्व अध्यक्ष रामानन्द शर्मा, विष्णु प्रोहा, सुरेश तिवारी, उमेश शर्मा, राजीव भारद्वाज, अनंत पांडेय मीडिया प्रभारी , भय्यो शर्मा, अनिल मिश्रा,दिनेश तिवारी भय्यो महाराज, गौतम पान्डेय, गोपाल काला, तिवारी, बलराम शर्मा, विजय मिश्रा, असीम भारद्वाज, शम्भू शर्मा, गोकूल पाठक, शुभम तिवारी, राज पान्डेय, कृष्णानंद शोकहा, अरुणराज वैद्य, पवन शास्त्री, रिषभ मिश्रा. राकेश शर्मा. सुनील प्रोहा. गूड्डू शर्मा, नीरज पान्डेय, सागर पान्डेय, अरविंद भारद्वाज, सहित अन्य वरिष्ठ प्रयागवाल तीर्थ पुरोहित उपस्थित रहे ।




