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हरियाली अमावस्या पर पीपल और तुलसी के पौधे की पूजन का विशेष महत्व : स्वामी महेशाश्रम

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। नागेश्वर धाम श्री दंडी स्वामी आश्रम में अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के संरक्षक जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम ने सावन के हरियाली अमावस्या विशेष महत्व है।
हिंदू धर्म में प्रत्येक मास में पड़ने वाले अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए व्रत रखा जाता है। स्वामी महेशाश्रम ने बताया श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है । ऐसे में श्रावण मास की अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। स्वामी महेशाश्रम ने कहा मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके पितरों को पिंडदान, श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।श्रावण मास कृष्ण पक्ष के शिवरात्रि के अगले दिन हरियाली अमावस्या होती है। इस दिन पेड़-पौधों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इसीलिए इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है। स्वामी महेशाश्रम जी ने बताया इस दिन पीपल और तुलसी के पौधे की पूजन का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार पीपल के पेड़ में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। इस दिन पौधे लगाने से श्रद्धलुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

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