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इमामबाड़ा हुसैन अली खान मे अलम ताबूत व ज़ुलजनाह की ज़ियारत कर मांगी कोरोना के खात्मे की दूआ

(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दरियाबाद के प्राचीन इमामबाड़ा हुसैन अली खाँ में माहे मोहर्रम की तीसरी को गाजी अब्बास के अलम,ताबूत व ज़ुलजनाह की शबीह की ज़ियारत करते हुए लोगों ने मन्नतें व मुरादें मांगी।इमाम हुसैन के वफादार घोड़े की शबीह पर सूती व फूलों की चादर चढ़ाई गई।अन्जुमन हाशिमया ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ कोविड गाईड लाइन को अमल मे लाते हुए तकरीबन सौ वर्षों से दरियाबाद के क़दम रसूल से उठने वाले जुलूस को नहीं निकालते हुए इमामबाड़ा हुसैन अली खाँ के अन्दुरुनी हिस्से मे इस का आयोजन किया।नौहाख्वान सफदर अब्बास डेज़ी,अर्शी,यासिर सिब्तैन फैज़ी अनादिल,मोहम्मद आदि ने शायर आमिरुर रिज़वी का लिखा नौहा *दिखती नहीं शबीह ए रसूले ज़मा की लाश!* *शब्बीर रन मे ढ़ूढ़ते हैं नौजवाँ की लाश!!*

वहीं शायर डॉ क़मर आब्दी का लिखा कलाम *चले भी आओ मेरे बेज़ुबाँ अली असग़र!*
*तुम्हे बुलाती है रो रो माँ अली असग़र!!*
नौहे के एक एक अशआर पर लोगों के आँखों से अश्क जारी रहा।नौहों को लयबद्ध करने मे ज़िया अब्बास व अनादिल ने ग़मगीन तर्जनिगारी के जौहर दिखाए।आयोजक ज़ौरेज़ हैदर के द्वारा हुए मातमी कार्यक्रम मे पुरुषों के बाद महिलाओं ने भी नौहा मातम का नज़राना पेश करते हुए ज़ुलजनाह की दूध जलेबी खिलाकर मन्नत व मुरादें मांगी।इमामबाड़ा के मुतावल्ली मंज़र अली ने अन्जुमन हाशिमया के प्रति आभार जताया।इस मौके पर आग़ा सरदार,सज्जू भाई मशहद अली खाँ,अकबर अली,रानू,दानिश,हसन नक़वी फरमान अहमद नक़वी,शफक़त अब्बास पाशा,ज़ौरेज़ हैदर ज़ामिन हसन सै०मो० अस्करी, औन ज़ैदी,जौन ज़ैदी समेत सैकड़ो हुसैन ए मज़लूम के शैदाई मौजूद रहे। वहीं करैली के वीआईपी कालोनी मे अमन जायसी द्वारा आयोजित मजलिस ए ग़म मे अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वान शादाब ज़मन,अस्करी अब्बास,शबीह अब्बास जाफरी,ज़हीर अब्बास अखलाक़ रज़ा ऐजाज़ कामरान यासिर जैदी,सोनू,अकबर,शबीह आदि ने ग़मगीन नौहा पढ़ते हुए हुसैन ए मज़लूम पर गिरया ओ ज़ारी किया।

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