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अफगानिस्तान संकट द्विपक्षीय व्यापार को बुरी तरह प्रभावित करेगा। व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। देश के 8 करोड़ व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े संगठन कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का मानना है कि हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान शासन के आगे बढ़ने से व्यापार में अनिश्चितता आने के कारण, काबुल और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा । प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र गोयल ने कहा कि अफगान से भारत सूखे किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, पाइन नट, पिस्ता, सूखे खुबानी और खुबानी, चेरी, तरबूज और औषधीय जड़ी-बूटियों जैसे ताजे फल आयात करता है। जबकि अफगानिस्तान को भारत द्वारा चाय, कॉफी, काली मिर्च और कपास, खिलौने, जूते और विभिन्न अन्य उपभोग्य वस्तुएं निर्यात की जाती हैं। आगे कहाकि भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2020-21 में 1.4 बिलियन अमरीकी डालर था, जबकि 2019-20 में 1.52 बिलियन अमरीकी डालर था। भारत से निर्यात 826 मिलियन अमरीकी डालर था और आयात 2020-21 में 510 मिलियन अमरीकी डालर था।

शहर के प्रमुख किराना व्यापारी पीयूष अग्रवाल एवम आशीष केसरी ने कहा कि अफगानिस्तान में राजनीतिक स्थिति की अनिश्चितता के कारण बाजारों में किराना और मेवे के कीमतों में काफी बढ़ोत्तरी हो सकती है। वर्तमान में आयात निर्यात शिपमेंट फंसे हुए हैं जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो सकता है। विभु अग्रवाल एवं अजय गुप्ता ने घरेलू निर्यातकों को सतर्क रहने की सलाह दी और घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने को कहा। बड़ी मात्रा में भुगतान अवरुद्ध होने की संभावना है जो व्यापारियों को कमजोर स्थिति में डाल देगा। सरकार को इसका संज्ञान लेना चाहिए और वित्तीय संकट का सामना करने की स्थिति में व्यापारियों की मदद करनी चाहिए। संजीव मिश्रा एवं मनीश शुक्ला ने कहा कि स्थिति नियंत्रण से बाहर होने के कारण कुछ समय तक कारोबारी गतिविधियां ठप्प रहने वाली हैं।
अनुपम अग्रवाल एवं गौतम अरोरा ने कहाकि अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि संपर्क का माध्यम सिर्फ हवाई जहाज है और आयात-निर्यात भी हवाई मार्ग से ही होता है और वर्तमान में यह बाधित हो गया है। अनिश्चितता कम होने के बाद ही व्यापार फिर से शुरू होगा और यह कब शुरू होगा कहा नहीं जा सकता। सबसे अधिक संभावना है, निजी कंपनियों को अफगानिस्तान को निर्यात करने के लिए तीसरे देशों के माध्यम से सौदा करना होगा लेकिन यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि स्थिति कैसे होती है। भारत से निर्यात पूरी तरह से बंद हो जाएगा क्योंकि अब समय पर भुगतान, एक बड़ा प्रश्न होगा।

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