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कोरोनाः मथुरा की विश्व प्रसिद्ध रामलीला के मंचर पर दूसरे साल भी रोक

 

कोरोना गाइड लाइन का हवाला देकर जिला प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

इस बार भी प्रतीकात्मकरूप से निभाई जाएगी परंपरा

( अनुराग शुक्ला )
मथुरा (अनुराग दर्शन समाचार)। मथुरा की विश्व प्रसिद्ध रामलीला का आयोजन इस साल भी नहीं होगा। रामलीला सभा को जिला प्रशासन ने आयोजन की अनुमति नहीं दी है। शहर में प्रतिवर्ष धूमधाम से होने वाली रामलीला का आयोजन इस बार नहीं होगा। क्यों कि कोविड-19 के चलते जिला प्रशासन ने रामलीला सभा को आयोजन करने की स्वीकृति निरस्त कर दी है। इस वर्ष पिछले वर्ष की तरह न ही रामलीला का मंचन किया जाएगा और न ही प्रसिद्ध रामबारात और दशहरा मेला का आयोजन होगा।
मथुरा में हर वर्ष होने वाली रामलीला 177 वर्ष पुरानी है। इसका पहला मंचन गऊघाट में यहीं के निवासी वाग्भट्ट जी ने विक्रम संवत 1893 यानी सन् 1836 में कराया। पहली बार वह रामलीला के स्वामी पद पर भी आसीन हुए। पंडित राधाकृष्ण ने मथुरावासियों के सहयोग से रामलीला कमेटी की स्थापना की, जो आज रामलीला सभा के रूप में है। रामलीला सभा की कार्यकारिणी की बैठक चित्रकूट मसानी स्थित रामलीला स्थल पर की गई, जिसमें प्रशासन के द्वारा रामलीला महोत्सव जिसका 28 सितंबर से 18 अक्टूबर तक आयोजन होना था। सभा के प्रधानमंत्री मूलचन्द गर्ग ने बताया कि सभा ने जब जिलाधिकारी से रामलीला के आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन जिला प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। सर्राफा कमेटी के मंत्री रामकुमार सर्राफ, किशोर भरतिया, मुकेश कुमार सर्राफ, सर्वेश शर्मा, गिरधारी शरण सर्राफ, अजय कुमार मास्टर ने एक स्वर से कहा कि वर्तमान परिस्थिति और कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए पिछले साल की भांति ही प्रतीकात्मक रुप में रामलीला महोत्सव 2021 मनाने का निर्णय गया है। इस दौरान रामलीला सभा मथुरा के निर्वाचन को तीन वर्ष पूर्ण होने के कारण कार्यकारिणी सभा में आगामी त्रैवार्षिक निर्वाचन पर भी विचार किया गया।

*जन्माष्टमी पर 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान*

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव में जिले में 25 से 30 लाख श्रद्धालु आने का अनुमान लगाया जा रहा है। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण श्रद्धालु आयोजनों में शामिल नहीं हो सके थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष ब्रज में करीब 25-30 लाख श्रद्धालु आने का अनुमान है। इनमें से पचास फीसद श्रद्धालु श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आ सकते हैं।

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