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आरओ वाटर प्लांट मालिकों को लेनी होगी एनओसी, देना होगा चार्ज

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अंधाधुंध जल दोहन करने वाले आरओ प्लांट संचालकों पर भूगर्भ जल विभाग ने नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है। बिना किसी शासनादेश के लाखों लीटर पानी की बिक्री करने वालों को अब शासन से ऑनलाइन एनओसी लेनी होगी। इसके लिए पांच हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा। जो प्लांट संचालक ऐसा नहीं करेंगे उनकी धरपकड़ के लिए ट्रास्क फोर्स टीम जिला, ब्लॉक और ग्रामसभा स्तर पर बनेगी। विभाग एनओसी लिए बिना प्लांट संचालन पर जुर्माना वसूलने संग प्लांट सीज करेगा। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक महज 12 लोगों ने एनओसी के लिए आवेदन किया है। इसमें से पांच को स्वीकृति मिली है।

जिले में 1200 से 1500 की संख्या में आरओ वाटर प्लांट और सात हजार से अधिक बोरिंग बिना एनओसी के संचालित हैं। संगम नगरी में आरओ वाटर की आपूर्ति बढ़ी है। खपत बढ़ने से कीमत में भी इजाफा हो रहा है। छह माह पहले जहां 20 लीटर आरओ वाटर का गैलन 20 रुपये में मिल रहा था। इस समय कई जगह 30 से 35 रुपये में मिल रहा है। भूगर्भ जल विभाग की सहायक अभियंता अर्चना सिंह ने बताया कि भूगर्भ विभाग ने चार क्राइटेरिया निर्धारित किया है। इसमें जल दोहन का अलग-अलग शुल्क निर्धारित है। सुरक्षित क्षेत्र में प्रतिदिन 500 घन मीटर पानी निकालने पर .90 पैसे, सेमी क्रिटिकल एरिया में एक रुपये और क्रिटिकल एरिया में 1.10 रुपये शुल्क देना होगा। अति दोहित इलाकों में प्लांट लगाने वालों को 1.20 रुपये देने होंगे। मात्रा बढ़ाने पर कीमत भी बढ़ेगी।
भूगर्भ जल विभाग की ओर से पीडीए और नगर निगम से विवाह घरों की सूची जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसी सूची के आधार पर सर्वे कर उनकी जांच कराकर उनसे वाटर टैक्स लिया जाएगा। सहायक अभियंता के अनुसार रजिस्ट्रेशन और एनओसी किसानों के लिए भी बोरिंग पर अनिवार्य है, लेकिन उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा।
आरओ वाटर की डिमांड शहर से गांव तक तेजी से बढ़ने लगी है। भूगर्भ जल विभाग के एक अधिकारी ने बताया प्रतिदिन लाखों लीटर पानी का दोहन हो रहा है।

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