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उत्तम शौच का अर्थ है पवित्रता। आचरण में नम्रता, विचारों में निर्मलता लाना ही शौच धर्म है

(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । श्री दिगंबर जैन पंचायती सभा प्रयागराज के तत्त्वधान में दसलक्षण पर्व नगर के विभिन्न जैन मंदिरो मे मनाया जा रहा है। इस दौरान धर्वलंबियो ने विश्व शांति की कामना के साथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की शांतिधारा, अभिषेक पंडित सुनील जैन के निर्देशन में किया गया। अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात भगवान के महापूजन का आयोजन हुआ। जिसमे नियम पूजन, तीर्थंकर पूजन के उपरांत दसलक्षण विधान का आयोजन हुआ। जिसमे श्रद्धालुओ ने केसरिया वस्त्रो में संगीतमयी धुनों पर भक्ति न्रत्य करके पूजन अर्चन् किया।
आज उत्तम शौच धर्म के दिन पंडित सुनील जैन ने बताया कि उत्तम शौच का अर्थ है पवित्रता। आचरण में नम्रता, विचारों में निर्मलता लाना ही शौच धर्म है। बाहर की पवित्रता का ध्यान तो हर कोई रखता है लेकिन यहां आंतरिक पवित्रता की बात है। आंतरिक पवित्रता तभी घटित होती है जब मनुष्य लोभ से मुक्त होता है। जैन महिला मंडल की बाला जैन ने पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पर्यूषण देश का ऐसा पर्व है जो मानव को भोग पथ से हटाकर योग पथ की ओर अग्रसर करता हैं। दसलक्षण पर्व आमोद प्रमोद का नही, बल्कि संयम, साधना और उपवास का पर्व है। पंचायती सभा के अध्यक्ष दिनेश कुमार जैन ने बताया कि दसलक्षणव पर्व जैन धर्म का महापर्व है। जो दस धर्मो के माध्यम से आत्म जागरण की शिक्षा देता है। सायं में सामूहिक आरती, शाश्त्र प्रवचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया एवं विजयी प्रतियोगियो को पुरस्कृत किया गया।मंगलवार को उत्तम सत्य धर्म की पूजा की जायेगी।

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