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आत्मा के अपने गुणों के सिवा जगत में अपनी अन्य कोई भी वस्तु नहीं है- पंडित सुनील जैन

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज नगर के विभिन्न जैन मंदिरो में पर्वाधिराज दसलक्षण महापर्व के नौवें दिन जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम अकिंचन धर्म की आराधना की। जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में सर्वप्रथम भगवान की शांति धारा एवं अभिषेक किया गया। । जैसे-जैसे पर्व समापन की ओर बढ़ रहा है, आराधना बढ़ती जा रही है। दसलक्षण पर्व में जैन श्रद्धालु व्रत, नियम और संयम का पालन कर पुण्य लाभ ले रहे हैं। उत्तम आंकिचन् के दिन जैन श्रद्धालुओ ने परिग्रह त्याग करने का संकल्प लिया। इसके पश्चात् पंडित सुनील जैन के निर्देशन में भगवान की पूजन अर्चन् एवं दसलक्षण विधान का आयोजन किया गया। पंडित सुनील जैन ने उत्तम अकिंचन धर्म पर कहा कि शरीर का वस्तु, रिश्तों, धन-संपदा के मोह और लालच से दूरियां बनाने को आकिंचन (अपरिग्रह) कहते हैं। आत्मा के अपने गुणों के सिवा जगत में अपनी अन्य कोई भी वस्तु नहीं है। सायंकालीन सामूहिक आरती, भक्ति, पंडित सुनील जैन द्वारा शास्त्र प्रवचन एवं इसके पश्चात फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें छोटे-छोटे बच्चों ने भाग लेकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने जैन धर्म से सम्बन्धित वेशभूषा में अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रतिभागियो को पुरस्कृत किया गया। कल दसलक्षण पर्व के अंतिम दिन रविवार को अनंत चतुर्दशी के दिन उत्तम ब्रहचर्य धर्म की आरधना की जायेगी।

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