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सन्त परम्परा की अपूरणीय क्षति है- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

महन्त नरेन्द्र गिरि बहुत ही मजबूत इच्छाशक्ति वाले सन्त थे- अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम

(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष तथा प्रयागराज स्थित श्री मठ बाघम्बरी के महन्त नरेन्द्र गिरि जी की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मृत्यु की दुखद् सूचना के पश्चात् श्री काशी सुमेरु पीठ वाराणसी में हुई शोक सभा में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह सन्त परम्परा की अपूरणीय क्षति है | शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि यह विश्वास करना कठिन है कि महंत नरेन्द्र गिरि जी ने आत्महत्या कर ली | सच क्या है ? यह तो ईश्वर ही जानें, परन्तु सरकार को इस वीभत्स स्तब्ध कर देने वाली घटना की पूरी जाँच करानी चाहिए | शंकराचार्य जी महाराज ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भगवान उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें, और उनके शिष्यों को इस कष्ट को सहन करने की सामर्थ्य प्रदान करें | शोक सभा में उपस्थित मठ मछली बन्दर के महन्त एवम् अखिल भारतीय दण्डी सन्यासी प्रबन्धन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी विमलदेव आश्रम ने कहा कि महन्त नरेन्द्र गिरि बहुत ही मजबूत इच्छाशक्ति वाले सन्त थे, उनकी मृत्यु हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है । शोक सभा में उपस्थित स्वामी इन्द्र प्रकाश आश्रम, स्वामी अखण्डानन्द तीर्थ, ब्रह्मचारी बृजभूषणानन्द जी, स्वामी श्रवणदेव आश्रम, स्वामी दुर्गेशानन्द तीर्थ,स्वामी इन्द्रदेव आश्रम,स्वामी बालेश्वरानन्द तीर्थ सहित सैकड़ों सन्यासियों ने महन्त नरेन्द्र गिरि के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की |

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