कन्या पूजन कर मांगे मां से मन मांगी मुरादे

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कन्या पूजन आप अष्टमी को करें या नवमी को, दो वर्ष से दस वर्ष तक की आयु वाली नौ कन्याओं को ही शामिल करें और साथ ही एक बटुक का पूजन करें। दो वर्ष की कन्या कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शांभवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य, दो कन्याओं के पूजन से भोग व मोक्ष, तीन कन्याओं के पूजन से धर्म, अर्थ व काम, चार कन्याओं के पूजन से राज्यपद, पांच कन्याओं के पूजन से विद्या, छह कन्याओं के पूजन से षष्टकर्म की सिद्धि, सात कन्याओं के पूजन से राज्य, आठ कन्याओं के पूजन से संपदा और नौ कन्याओं के पूजन से सर्वकार्य सिद्धि की प्राप्ति होती है। कन्याएं मां दुर्गा का भौतिक रूप हैं। इनकी श्रद्धाभक्ति से पूजा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। कन्या पूजन के दौरान सर्वप्रथम कन्याओं के पैर धोकर उनके मस्तक पर रोली-चावल से नवरात्रि में प्रत्येक दिन देवी आराधना भेंट करें, जिससे कन्या का अंतर्मनस्व टीका लगाकर हाथ में कलावा (मौली) बांधकर, पुष्प या पुष्पमाला अर्पित करें। फिर कन्याओं को चुनरी, हलवा, पूरी, चना और दक्षिणा देकर श्रद्धापूर्वक उनको प्रणाम करना चाहिए। कुछ लोग अपनी परंपरा के अनुसार कन्याओं को शृंगार की वस्तुएं भी भेंट करते हैं। इस प्रकार भगवती दुर्गा के भक्तों को नवरात्रि में जगजननी के नौ रूपों का कन्या पूजन श्रद्धा और समर्पण के साथ आचार-विचार, आहार एवं व्यवहार को शुद्ध रखते हुए करना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा के भक्तों का कल्याण होता है और सर्वजन ‘भावना का उदय होता है।




