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राम वानरों की विशाल सेना के साथ रावण के विनाश के अभियान पर निकल पड़े

 

राम काज लगि तव अवतारा
सुनतहिं भयउ पर्वताकारा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्री पथरचट्टी रामलीला कमेटी की रामलीला ‘कथा रामराज की ‘ का सातवां दिन । दर्शकों की राम के प्रति आस्था ले रही हिलोरें । समुद्र तट पर वानरों का समूह । सागर पार लंका पहुंचने की जुगत में लीन । सौ योजन के समुद्र को पार कर लंका पहुंचने की विकट समस्या । सारे वानर समूह की व्यक्त अक्षमता से निराशा । जाम्बवन्त का हनुमान को उत्साह
का चुप साधि रह्यो बलवाना –
‘ राम काज लगि तव अवतारा ।
सुनतहिं भयउ पर्वताकारा ‘
हनुमान का प्रयाण । नागमाता सुरसा का रास्ता रोकना पर , उन्हें खा जाने की लालसा रखे हुये ।
चामत्कारिक दृश्य देख कर विशालकाय सुरसा का दृश्य लघुरूप बना कर उसके मुख में प्रवेश कर उससे बाहर आने के अद्भुत दृश्य ने मोह लिया दर्शकों को । करतल ध्वनि से दर्शकों की हर्षाभिव्यक्ति हुई ।तभी लंका में प्रवेश कर सीता की खोज में समस्त लंका नगर में हनुमान का भृमण होता है। वही अशोक वाटिका में सीता के होने की सूचना मिलने पर पेड़ पर छुपे हनुमान ने रावण का अशोक वन में प्रवेश किया सीता को
प्रलोभन – सीता की फटकार ।
खिसियाया रावण एक मास का समय दे कर वापस लौटता है ।तभी ‘ सुनो सुनो रे राम कहानी ‘ , पेड़ पर छुपे हनुमान ने सारी रामकथा सुना दी ।यह सुन कर सीता चकित हो जाती है । राम की अंगूठी गिरा कर हनुमान प्रकट हुए । और नर- वानर की
मित्रता की कथा सुनाई और सांत्वना दी। कि अब सब कुछ मंगलमयं होगा । सीता की आज्ञा ले कर फल खाने के बहाने हनुमान का अशोक वाटिका को विध्वंस कर दिया। राक्षस पहरेदारों का वध , अंततः मेघनाद कोआना पड़ा उसने ब्रह्मपाश में बांध कर रावण के दरबार में ले गया। रावण को रामदूत के रूप में सीता को सम्मान के साथ राम को लौटाने आदि की सीख दी पर सबकुछ
मोहक रूप में मंचित सभी दर्शक विमुग्ध हुये। हनुमान की पूंछ में आग लगने का रावण का निर्देश दिया और फिर , उलट पलटि लंका सब जारी ।कूदि परा पुनि सिंधु मंझारी । सीता से राम को कुछ निशानी देने का हनुमान का आग्रह , चूड़ामणि उतारि तब दयऊ हरष समेत पवनसुत लयऊ ।और , सीता को आश्वस्त किया ,
‘ कछुक दिवस जननी धरु धीरा।
कपिन्ह सहित अइहैं रघुबीरा ।
निसिचर मारि तोहि लै जइहैं

तब राम को सीता की निशानी दिया। हनुमान को गले लगा कर राम की अभिव्यक्ति , ‘ सुनु सुत तोहि उरिन मैं नाहीं ।
विभीषण की सीता को वापस देने की सलाह पर उसे लात मार कर लंका से निष्कासन कर उनका राम की शरण में जाना , राम का उनका अभिषेक कर लंका का राजा घोषित करना मंचन बड़ा ही मोहक रहा ।
रामजी की सेना चली
पापियों के नाश को , धर्म के प्रकाश को
रामजी की सेना चली ।
छहसमुद्र पार कर लंका पर चढ़ाई का राम सेना के सामने ज्वलन्त संकट खड़ा हुआ । राम ने विभीषण से सेतु पार जाने का उपाय पूछा तब बताया प्रभु तुम्हार कुलुगुरु जलधि , कहिहि उपाय विचार । तीन दिन तक समुद्र से रास्ता देने की प्रार्थना लेकिन और बिनय न मानत जलधि जड़ , गए तीन दिन
बीत जब जल से कोई रास्ता नही बना तब क्रोधित राम ने लक्ष्मण
से समुद्र को सोख लेने वाला बयान मांगा तभी भयभीत समुद्र ने शिला- खंडों से सेतु बनाने की विनम्र सलाह दी । सेतु पर पत्थर ला ला कर दे रहे सेतु बाधने के वानरों के प्रयास का इतना सुंदर मंचन किया जिसे दर्शक परम् उत्साही हो ‘ जय श्री राम का उद्घोष करने लगे । सेतु निर्माण के पहले रामेश्वरम की स्थापना का भी बहुत मोहक दृश्य मंचित हुआ । सेतु सेना को पार ले जाने को तैयार । राम वानरों की विशाल सेना के साथ रावण के विनाश के अभियान पर निकल पड़े।
रामजी की सेना चली,
पापियों के नाश को , धर्म के प्रकाश को , रामजी की सेना चली। फिर ,सीताराम चरित अति पावन मधुर , सरस , अरु अति मनभावन ।रहा।

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