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डा. अम्बेडकर ने भारत से लुप्त हुये बौद्ध धम्म का पुनरुत्थान किया

धम्म दीक्षा दिवस पर सम्राट अशोक विजय दशमी का आयोजन आज

बुद्धं शरणं गच्छामि से गुंजायमान होगा हाईकोर्ट चौराहा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। प्रबुद्ध फाउंडेशन, देवपती मेमोरियल ट्रस्ट, डा. अम्बेडकर वेलफेयर एसोसिएशन (दावा) के संयुक्त तत्वावधान में धम्म चक्क पवत्तनाय धम्म दीक्षा दिवस (14 अक्टूबर 1956) की 65 वीं वर्षगांठ पर धम्म विजय दिवस व सम्राट अशोक विजय दशमी का आयोजन काल दिनांक 15 अक्टूबर 2021 को दोपहर 12 बजे से हाईकोर्ट स्थित डा. अम्बेडकर मूर्ति स्थल पर आयोजित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के हर जिले से लोगों की आने की सम्भावना है। कार्यक्रम दर्जनों भन्ते द्वारा बुद्ध वंदना, त्रिशरण, पंचशील के पाठ के साथ शुभारंभ होगा। धम्म चक्क प्रवर्तन दिवस भारतीय बौद्धों का एक पावन पवित्र उत्सव है।दुनिया भर से लाखों बौद्ध अनुयायी इकट्ठा होकर हर साल अशोक विजयादशमी के रूप में इसे मुख्य रूप से दीक्षा भूमि महाराष्ट्र में मनाते है। इस उत्सव को स्थानीय स्तर पर भी मनाया जाता है। विसवी सदी के मध्य में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने विजयादशमी के दिन 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने दस लाख अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था। डा. अम्बेडकर ने जहां बौद्ध धर्म की दीक्षा ली वह भूमि आज दीक्षा भूमि के नाम से जानी जाती है। डा. अम्बेडकर ने जब बौद्ध धर्म अपनाया था तब बुद्धाब्ध (बौद्ध वर्ष) 2500 था। विश्व के कई देशों एवं भारत के हर राज्यों से बौद्ध अनुयायी हर साल दीक्षा भूमि, नागपुर जाकर धम्म चक्क पवत्तन दिवस विजयादशमी को एक उत्सव के रूप में मनाते है। यह त्योहार व्यापक रूप से डा. अम्बेडकर के बौद्ध अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है। डा. बाबासाहेब आम्बेडकर ने यह दिन बौद्ध धम्म दीक्षा के लिये इसलिये चुना क्योंकि इसी दिन ईसा पूर्व तीसरी सदी में सम्राट अशोक ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। तब से यह दिवस बौद्ध इतिहास में अशोक विजयादशमी के रूप में जाना जाता है। डा. बाबासाहेब आम्बेडकर ने बीसवीं सदी में बौद्ध धम्म अपनाकर भारत के लुप्त हुए धर्म का भारत मे पुनरुत्थान किया।

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