कैन्ट में एमईएस के खम्भों में लगी स्ट्रीट लाइटों खराब

सड़कों पर अंधेरे के चलते रोज हो रही दुर्घटना
(राजेश सोनकर )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । छावनी क्षेत्र स्थित कैन्ट स्थित सीडीए पेंशन आफिस की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग (सड़क) पर पिछले एक डेढ़ वर्ष से रोड किनारे लगे लगभग आधा दर्जन से अधिक खम्भों पर लगीं सभी स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं। शाम ढ़लते ही इस मार्ग पर घना अंधेरा छा जाता है,आये दिन राहगीर दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। बीती रात सदर बाजार निवासी अमित कुमार (घोंचू)और उसके दोस्त जतिन को जो कि सड़क किनारे पटरी पर खड़े बात कर रहे थे को कार सवार चालक टक्कर मारकर भाग निकला । कारण एक तो अंधेरा और उस पर घना कोहरा था । शायद कार ड्राइवर को पटरी पर खड़े दोनों दोस्त नजर नहीं आये और उसने टक्कर मार दी। घायलावस्था में दोनों को निकट कैन्टोन्मेंट हास्पिटल ले जाया गया। लम्बे समय से दोनों संबंधित विभागों कैंट बोर्ड व एमईएस को खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों और सड़क पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं की जानकारी है।लेकिन संबंधित विभागों के द्वारा स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत नहीं करवाई जा रही है। जिसके कारण सीडीए पेंशन स्टाफ क्वार्टर, आई बाजार सदर बाजार उंचवा के लोग जिनका हर समय इस मार्ग से आना जाना लगा रहता है। घने अन्धकार के चलते अंधेरी सड़क पर बैठे आवारा जानवरों आने जाने वाले वाहनों से टकराकर चोटिल होते हैं।अब तक कई लोग सड़क पर छाये घोर अन्धकार के कारण घटनाग्रस्त हो चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सबसे बड़ी बात ये है कि इसी सड़क के किनारे कैन्टोन्मेंट स्टोर है। जो शाम ढ़लते ही अंधेरे में गायब हो जाता है। जिसका ताजातरीन उदाहरण है कैंट स्टोर से सटे नवनिर्मित हनुमान मंदिर में लगे पीतल के घण्टों को क्षेत्रीय स्मैकियों ने चोरी कर उतारकर चलते बने जबकि यहां सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। लेकिन अंधेरे के कारण चोरों का कोई सुराग कैमरे में दिखाई नहीं पड़ा सिर्फ नीम अंधेरा सीसीटीवी कैमरे में नजर आ रहा था । चौंकाने वाली बात तो यह है कि इतना बड़ा कैंट स्टोर है लेकिन उसके सामने स्ट्रीट लाइट का एक भी खम्भा नहीं लगा है। गलती विभागीय लेकिन गाज गिरी चौकीदार पर चोरी गये घण्टों की भरपाई चौकीदार के मासिक वेतन से की गई। यहां भी स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। जब कि केंद्र सरकार का एक बड़ा विभाग यहाँ पर रहता है तभी यहाँ के लोग कहते है कि यह चिराग तले अंधेरा ही अंधेरा है।




