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श्रीमद् भागवत मानवीय संवेदनाओं की सबसे बड़ी पाठशाला है: अनिरुद्ध जी महाराज

प्रयागराज। आज दिनांक 17 12:00 19 को मुंशी राम प्रसाद की बगिया नारायण वाटिका में चल रहे दिव्य अध्यात्म रास य सेवा मिशन प्रयागराज के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर भक्तजनों को कथा का सार श्रवण कराते हुए पूज्य डॉक्टर अनिरुद्ध जी महाराज ने कहा कि सेवा मनुष्य का धर्म है और मानव मात्र की सेवा धर्म समझकर करनी चाहिए क्योंकि मनुष्य ही मानवीय मूल्यों की संवेदना को समझता है और श्रीमद्भागवत मानवीय संवेदनाओं की सबसे बड़ी पाठशाला है जिसमें सभी का हित एवं कल्याण की कामना की गई है ।

महाराज जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत महापुराण कल्पवृक्ष की तरह है जिसके नीचे बैठकर किसी भी प्रकार की कामना करें तो अभीष्ट प्राप्त होता है आज की कथा के मुख्य यजमान एवं संचालन कर्ता श्री राजेश केसरवानी जी रहे।

कथा में मुख्य अतिथि श्री सत्येंद्र चोपड़ा नेता सदन नगर निगम एवं भाजपा मंडल अध्यक्ष दिनेश विश्वकर्मा श्री किशोरी लाल जयसवाल जी ने महा आरती की आज की कथा में मुख्य रूप से सर्वश्री कुमार नारायण, प्यारेलाल जायसवाल, राकेश टंडन, कृष्ण मोहन राय, परितोष मिश्रा, विमला केसरवानी, साधना चतुर्वेदी, संतोष चौरसिया, अशोक सिंह, अभिलाष केसरवानी, कुसुम केसरवानी, पूजा गुप्ता, प्रीती गुप्ता, राहुल पटेल, मधुसूदन निषाद, विजयलक्ष्मी, सुषमा गुप्ता, रेखा यादव, लता उपाध्याय, गीता साहू, विमला विश्वकर्मा आदि सैकड़ों भक्त मौजूद रहे और कथा का आनंद लिया.।

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