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पान की खेती को बढ़ावा देने पर जोर

फूलपुर के चिलौड़ा गांव में पान की हो रही खेती

कृषि वैज्ञानिक कृषकों को दे रहे तकनीकी जानकारी

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जिले में पान की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। यहां के कृषकों काे पान की खेती की आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक किसानों के बीच में जाकर बता रहे हैं कि वह किस तरह से पान की खेती करके लाभ पा सकते हैं। इसके लिए सरकार की ओर से भी अनुदान दिया जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों बोले, आप करो पान की खेती, हम करेंगे मदद

औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसरोबाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन पान उत्पादक कृषकों को फूलपुर विकासखंड के चिलौड़ा गांव में हो रही पान की खेती का भ्रमण कराया गया। मुख्य उद्यान विशेषज्ञ खुसरोबाग कृष्ण मोहन चौधरी एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक एनबीआरआई लखनऊ डाॅ. रामसेवक चौरसिया द्वारा भ्रमण दल के किसानों को पान की खेती की तकनीकी जानकारी दी गई। पान बरेजा निर्माण में कृषकों को रखी जाने वाली सावधानियां तथा प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों आदि के बारे में बताया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि आप पान की खेती करो, जरूरत पड़ने पर हम आपकी मदद करेंगे। औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षण प्रभारी वीके सिंह द्वारा बताया गया कि दिसंबर व जनवरी माह में पान उत्पादक कृषकों को तकनीकी जानकारी देने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी निश्शुल्क किया जाएगा। इच्छुक कृषक अपना पंजीकरण समय से अवश्य करा लें।

*नीम ऑयल के छिड़काव की सलाह*

पान उत्पादक कृषकों ने पान में लगने वाले प्रमुख रोग पान में पत्ती का जीवाणु रोग लीफ स्पॉट एवं एंथ्रेक्नोज को प्रमुख समस्या बताया। डाॅ. रामसेवक चौरसिया ने इस रोग से बचाव के लिए तीन ग्राम मैनकोज़ेब दवा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव की सलाह दी। इसके अलावा पान में लगने वाले प्रमुख कीट ह्वाइट फ्लाई के नियंत्रण के लिए 0.5% डाई मेथोएड एवं नीम आयल के छिड़काव की सलाह दी गई। मुख्य उद्यान विशेषज्ञ द्वारा बताया गया कि दिसंबर व जनवरी के महीने में तापमान कम होने के कारण पान की फसल को अधिक हानि होने की संभावना होती है इसलिए पान उत्पादक कृषकों को चाहिए की पान बरेजा की सफाई करते रहें तथा 15 से 20 दिनों के अंतराल पर बोर्डो मिश्रण का स्प्रे करें। इसके साथ साथ पान की फसल वाली भूमि पर नमी बनाए रखें, जिससे कि पाला का असर पान पर ना हो।

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