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एक ओर शिल्पगत सामग्रियों की धूम मची थी वहीं हरियाणा राज्य से आए बीन वादन की धुन पर दर्शक थिरकते दिखे

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के अद्भुत संगम तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरती पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज द्वारा १२ दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले की आज नौवें दिवस में सांस्कृतिक संध्या एवं शिल्पकारी की अप्रतिम शोभा ने पूरे प्रयागराज वासियों के बीच चर्चा का स्थान ले लिया है। एक ओर शिल्पगत सामग्रियों की धूम मची थी वहीं हरियाणा राज्य से आए बीन वादन की धुन पर दर्शक थिरकते दिखे, तो कई व्यंजनों की स्टॉल पर लंबी कतारें दिखी। टेराकोटा के कारीगर अपनी मूतियों के कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं तो वहीं सांस्कृतिक संध्या में विभिन्न राज्यों की अद्वितीय छटा से दर्शक मंत्रमुग्ध होते दिखे।कार्यक्रम का शुभारंभ आंचलिक लोक गायक प्राणेश देशपाण्डे ने भजन गाकर किया। लोकनृत्य की फेहरिस्त में हिमांचल प्रदेश के दल ने ‘‘छूबा, गाची, गलबंध, पट्टू आदि पहन कर वाद्ययंत्रों की धुन पर किया, जो मुख्यतः सामूहिक कार्यक्रमों एवं विवाह के अवसर पर किया जाता है। गुजरात से आये हुए नितिन दवे एवं दल ने डांडिया रास से समां बांधा। पंजाब से आये रवि कन्नूर एवं दल के कलाकारों ने भांगड़ा नृत्य की अद्भुत प्रस्तुति दी, उन्होंने बताया कि जब से पंजाब है, तब से भांगड़ा है। भांगड़ा का निर्माण झूमर, लूर आदि पारम्परिक लोकनृत्यों का मिश्रण है। उन्होंने ‘‘जिन्द माही जे चले ओ पटियाले’’ पर प्रस्तुति दी। झारखण्ड से आए परमानंद एवं दल ने खासवां छऊ नृत्य धुन बजाकर भाव प्रधान बाली वध की प्रस्तुति दी। असम से आए दल ने पारंपरिक परिधान में असम का राजकीय नृत्य ‘बिहू’ ‘सोराई बहे लले’ नामक गीत की प्रस्तुति कर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके पश्चात मिर्जापुर से आए जटाशंकर एवं दल ने लोक-गांव का नृत्य चौलर की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अन्त में महाराष्ट्र मुम्बई से पधारे श्रद्धा सतविद्कर एवं दल ने वाग्यामुखी नृत्य पेश किया, जिसमें उन्होंने भगवान शंकर (खण्डो बा) की आराधना ‘‘जेजुरिया खंडेराया जागराला याया’’ प्रस्तुत करके एक नई संस्कृति से प्रयागराज के दर्शकों का परिचय कराया।कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र निदेशक ने सभी उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।

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