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आराधना महोत्सव-जन कल्याण के लिए धर्मसत्ता और राज्यसत्ता में समन्वय जरूरी – शंकराचार्य वासुदेवानंद

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। सनातन धर्म का मूल है मानव मात्र का कल्याण है। इस मानव कल्याण को धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के बंधनों से मुक्त रखा गया है, क्योंकि सनातन धर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सूत्र पर ही जीवन के क्रिया – कलापों, आदेशों, मान्यताओं और वर्जनाओं को सुनिश्चित व निर्धारित करता है। धर्म केवल धर्म होता है जो धर्म नहीं है वही अधर्म है। जो अधर्म है वह किसी को भी नहीं करना चाहिए। धर्म क्या है क्या करना है या निर्धारित करना और बताना धर्म सत्ता अर्थात धर्म गुरुओं का कार्य है और धर्म गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलना और चलने के लिए सुख सुविधा एवं साधन उपलब्ध कराना राज्यसत्ता का दायित्व है। उक्त बातें आज आराधना महोत्सव अलोपीबाग ने श्रीमद्ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने अपने आशीर्वाद में बताया। पूर्व ज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य गुरुओं की स्मृति में आयोजित आराधना महोत्सव में सातवें दिन प्राचीन श्री राम जानकी मंदिर, त्रिवेणी बांध में वार्षिक पाटोत्सव में भव्य पूजा आरती और प्रसाद वितरण भी युवा। कथा व्यास स्वामी श्रवणनंद जी ने अपने संगीतमय सरल वाणी और सहज वाणी से श्रीमद् भागवत महापुराण के प्रसंगों पर आधारित मानव जीवन में उपयोगी सनातन धर्म, कर्म व आचरण पर विस्तार से बताया।

श्रीमद्ज्योतिषपीठ प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी ने बताया कि 16 दिसंबर 2021 को प्रातः 7:00 बजे से जयपुर निवासी श्री प्यारे मोहन जी द्वारा रामचरितमानस का संगीत मय गायन वाचन अपरान्ह 2:00 बजे से व्यास स्वामी श्रवणनंद जी द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा एवं सांय 5:30 बजे से पूज्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी का आशीर्वाद एवं आरती कार्यक्रम होगा। सांय 7:00 बजे से भगवान शंकराचार्य मंदिर स्थित भगवान मैंदानेश्वर बाबा मंदिर में यज्ञात्मक रुद्राभिषेक संपन्न होगा।

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