आराधना महोत्सव- सनातन वैदिक धर्म व संस्कृति को नष्ट करने का प्रयास रोका आदि शंकराचार्य ने- शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। श्रीमज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु की परंपरा में स्थापित गुरुओं की स्मृति में आयोजित नौ दिवसीय आराधना महोत्सव अलोपीबाग में अपने आशीर्वाद में बताया कि लगभग 2600 वर्षों पूर्व सनातन धर्म वैदिक ज्ञान परंपरा को रोकने व भ्रमित करने का प्रयास नास्तिक चार्वाक एवं कपालीको द्वारा किया जा रहा था। एकात्मवाद को समाप्त कर यज्ञादि कर्मों का तिरस्कार किया जा रहा था। ऐसी ही स्थिति में भगवान आदि शंकराचार्य का कलीगत 2631 वैशाख शुक्ल पंचमी को अवतार हुआ। उन्होंने 11 वर्ष की आस्था में समस्त विधाओं को प्राप्त कर संयास ले लिया। इसके बाद काशी बद्रीनाथ आदि विभिन्न धार्मिक स्थानों में जाकर बद्रिकाश्रम में भगवान बद्रीनाथ के विग्रह की पुनस्थर्पना किया। सनातन वैदिक ज्ञान परंपरा व संस्कृति का प्रचार प्रसार किया। कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी कलिगत 2646 को ज्योतिषपीठ ज्योर्तिमठ पश्चिमी भारत में द्वारिका पुरी कलिगत 2648 में शारदा मठ कलिगत संवत 2648 (फाल्गुन मास) में दक्षिण प्रांत में श्रृंगेरी मठ एवं वैशाख मास कलिगत संवत 2655 को जगन्नाथपुरी में गोवर्धन मठ की स्थापना की। इन सभी मठों में एक एक शिष्य को आचार्य घोषित करके उन्हें भी अपना नाम पद शंकराचार्य दे दिया। प्रत्येक पीठ का वरिष्ठ विद्वान शिष्य ही उस पीठ का शंकराचार्य होगा। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने बताया की उसी गुरु शिष्य परंपरा में 1941 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी 1941 ईस्वी (विक्रम संवत 1998) चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नाम पद पर पीठासीन हुए। उनके ब्रह्मलीन होने पर स्वामी शांतानंद सरस्वती जी 1953 ईस्वी में 12 जून को तथा इनके द्वारा स्वामी विष्णुदेवानंद जी महाराज को भी श्रीमज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य नाम पद अभिषिक्त किया गया। स्वामी विष्णुदेवानंद सरस्वती जी की वसीयत के आधार पर ही 14-15 नवंबर 1989 ईसवी को मुझे (स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को) ज्योतिषपीठाधीश्वर नाम पद पर पीठासीन किया गया। आराधना महोत्सव में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनाते हुए स्वामी श्रवणानंद जी महाराज ने श्री कृष्ण के संपूर्ण जीवन लीला चरित्र कौरव पांडवों के बीच समाधान में उनकी भूमिका एवं विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का संगीतमय लोक भाषा में प्रस्तुत किया। ज्योतिषपीठ प्रवक्ता ओंकारनाथ त्रिपाठी ने बताया की स्वामी शांतानंद सरस्वती जी की जयंती के उपलक्ष में आराधना महोत्सव के अंतिम दिन 17 दिसंबर को अपरान्ह 2:00 से 4:30 तक श्रीमद् भागवत कथा एवं 4:30 से 5:30 तक सामाजिक सम्मान कार्यक्रम संपन्न होगा।



