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राम ने समाज के पिछड़े सबसे पीछे की पाँत में बैठे समाज के अनदेखे लोगों को अपनाने का काम किया-अखिलेश मणि शांडिल्य

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार । राम रामबाग स्थित पथर्चट्टी रामलीला मैदान में चल रही रामकथा नौ दिन सुनिए रामकथा की लौकिक सुख के साधन तो संसार के हर बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं। लेकिन मन को आंतरिक आनंद की उपलब्धि तो राम की चर्चा उनकी कथा के पंडाल में बैठ कर श्रवण करने से ही प्राप्त हो सकती है । राम की कथा मन की विश्रांति का एकमेव साधन है। वह सहज उपलब्ध नहीं है । ‘ रामकथा दुर्लभ संसारा ‘ कहा है तुलसी ने । रामकथा के आयोजन को लोक हितकारी आयोजन माना जाना चाहिए ।
संगीत की मधुर स्वरलहरी में
चारीचौरा के कथाव्यास प0
हेमंत तिवारी ने रामकथ सुना कर श्रोताओं के मन मुग्ध किया ।
जालौन की मानस माधुरी पंडिता
अखिलेश्वरी ने अत्यंत मधुर स्वर में मोहक संगीत के माध्यम से रामकथ कहते हुए बताया , राम परम कृपालु हैं। वे सेवक के
प्रति सदा दयाभाव रखते हैं ।
केवट हो शबरी हो सुग्रीव हों सर्वहारा थे। सभी लेकिन राम की शरण में गए । तो सभी को उनकी कृपा मिली धन्य हुए सभी ।
सामाजिक संदर्भों से रामकथा को जोड़ते हुए देवरिया के विख्यात रामकथा वाचक अखिलेश मणि
शांडिल्य ने कहा समाज के पिछड़े सबसे पीछे की पाँत में बैठे समाज के अनदेखे लोगों को अपनाने का काम किया और उस वर्ग को समानिक प्रतिष्ठा दिलाई । उन्हें गले लगाया जिन्हें समाज अस्पर्श्य मानता था । राम के राज में कहते हैं । शेर और बकरी एक घाट पानी पीते थे। सामाजिक समरसता कायम कर राम ने बड़े , छोटे , ऊंच- नीच के भाव को समाप्त कर दिया था । आज के सभी जनों शासक वर्ग को भी रामकथा यही सर्व श्रेयशकर मार्ग का अनुसरण करने की सीख देती है । 24 दिसम्बर तक चलने वाले ‘ नौ दिन सुनिए रामकथा ‘ कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन लल्लूलाल गुप्त ‘ सौरभ ‘कर रहे हैं ।

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