शिक्षा किसी भी देश या समाज के विकास का आधारभूत ढांचा: रामबृज गौतम

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। शिक्षा किसी भी देश या समाज के विकास का आधारभूत ढांचा होता है। जिस देश की शिक्षा प्रणाली उच्च कोटि की होती है, उस देश का विकास बहुत तेज गति से होता है। आज दुनिया भर में यह प्रमाणित हो चुका है कि शिक्षा हर एक नागरिक का सम्पूर्ण विकास करती है। भारत में वर्तमान में साक्षरता 75 प्रतिशत के आस-पास है। शिक्षा मनुष्य के विचारों से लेकर उसकी सम्पूर्ण जीवन शैली को प्रतिबिंबित व प्रभावित करती है। उक्त विचार बतौर मुख्य अतिथि बसपा के पूर्व मण्डल सेक्टर प्रभारी रामबृज गौतम ने सोमवार को बहुजन समाज पार्टी के तत्वावधान में आयोजित शहर पश्चिमी विधानसभा की ग्रामसभा भगवतपुर में सावित्रीबाई फुले की 191वीं जयन्ती पर व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले उस दौर में कैसे स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल या विधवा-विवाह जैसी कुरीतियों पर आवाज उठाई होगी ? उन्होंने कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी भारत की शिक्षा व्यवस्था अन्य देशों की तुलना मे काफी निम्न स्तर की है जो भारत के लिए गंभीर समस्या है। यदि भारत को बहुत तेज गति से विकास करना है, तो उसे अपनी शिक्षा व्यवस्था मे सुधार करना होगा। उन्होंने कहा कि आज देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले के योगदान को जिस तरह याद करना चाहिए वैसे नहीं किया जाता। समाजसेवी रामलाल बौद्ध ने कहा कि 19वीं सदी में जब देश राजनैतिक गुलामी के साथ-साथ सामाजिक गुलामी के भी दौर से गुजर रहा था तब सावित्री बाई फुले ने शिक्षा के महत्व को जाना, समझा और महिलाओं की आजादी के नए द्वार खोलकर उनमें नई चेतना का सृजन किया। समाजसेवी हीरालाल बौद्ध ने कहा कि गुलाम भारत में महिलाओं को पढ़ने-लिखने का अधिकार नहीं था। आज उनकी जयंती पर उनके द्वारा किए गए योगदान को समझना और जानना और भी जरूरी हो जाता है। ऐसी समाज सेविका जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई, क्या हम उनके योगदान और बलिदान के साथ न्याय कर पाए ? समारोह में हुबलाल, भोला, रामसेवक, रामनरेश, सोनू, बसंतलाल, किशन, बृजलाल, रंजीत, अमृत लाल, सुनील, कलावती, गीता, सुमन आदि लोग उपस्थित रहे।

