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अनुराग दर्शन खबर का असर: प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा को उनके पद से रेलवे बोर्ड ने हटाया

  • रेल मंत्री द्वारा रोस्टर घोटाले पर कार्रवाई
  • प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा को उनके पद से रेलवे बोर्ड ने हटाया
  • अब इस पद को मुख्यालय में ही कार्यरत शैलेंद्र कपिल संभालेंगे

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । उत्तर मध्य रेलवे के विवादित और रोस्टर घोटाले में प्रयागराज जोन के वरिष्ठ अधिकारियों पर रेल मंत्री की गाज गिरना शुरू हो चुका है पिछले कई माह से अनुराग दर्शन समाचार पत्र के माध्यम से रोस्टर घोटाले का मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच और रेल मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत होने के बाद जांच का क्रम तेज हो गया वही रेल मंत्री के प्रयागराज निरीक्षण के बाद रेल मंत्री ने रोस्टर घोटाले की जांच में अधिकारियों पर कार्रवाई होना शुरू हो चुका है।

वही रोस्टर घोटाले होने के बाद आरोपों का सामना कर रहे प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा को उनके पद से रेलवे बोर्ड ने हटा दिया है। उत्तर मध्य रेलवे में अब इस पद को मुख्यालय में ही कार्यरत कपिल कुमार, जिन्हें शैलेंद्र कपिल के नाम से जाना जाता है।अब वे संभालेंगे। रेलवे बोर्ड से स्थानांतरण का आदेश मंगलवार की सुबह पहुंचने की संभावना है।

साथ ही रोस्टर घोटाला मामले की जांच में तेजी आ सकती है। गौरतलब है कि पीसीसीएम यानी प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक एमएन ओझा पर प्रयागराज, आगरा और झांसी मंडल में वाणिज्य विभाग में हुए रोस्टर घोटाले के आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप है।

प्रयागराज मंडल के प्रमुख आरोपी एसके पांडे को एमएन ओझा का करीबी बताया जाता है। आईआरटीएस अफसर ओझा को अभी एनसीआर मुख्यालय में कम महत्व वाले पद पर बैठाया जा रहा है।

प्रयागराज में हुई शुरुआती जांच के दौरान यह साबित हो चुका है कि कोरोनावायरस के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने बिना ड्यूटी किए वेतन लिया है। ट्रेनों में गलत तरीके से ड्यूटी दी गई। इन अनियमितताओं के बदले सीआईडी रोस्टर पर पैसा वसूली का आरोप है लाभान्वित कर्मचारियों से रोस्टर इंचार्ज ने खाते में पैसे का लेनदेन किया है ।

यह भी साबित हो चुका है। वही शिकायतकर्ता संतोष उपाध्याय का आरोप है कि इस मामले को एमएन ओझा लगातार दबा रहे थे। आरोपियों को संरक्षण देने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। इस प्रकरण को लेकर संतोष उपाध्याय ने प्रधानमंत्री कार्यालय, सीवीसी, रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड चेयरमैन समेत उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, प्रयागराज रेल मंडल के डीआरएम तक शिकायतें पहुंचाई हैं।

शिकायतकर्ता संतोष का कहना है कि रेलवे बोर्ड ने न्याय की दिशा में छोटा कदम उठाया है। लेकिन ओझा को अभी भी उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय में ही रखा गया है। इससे जांच प्रभावित हो सकती है। एमएन ओझा के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई सीधे तौर पर नहीं हुई है। बड़ा अफसर होने के नाते प्रयागराज मंडल के अफसरों पर अब भी वह दबाव बना सकते हैं। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि एमएन ओझा को जल्द ही उत्तर मध्य रेलवे से बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है और महत्वहीन पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

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