शस्त्र और शास्त्र के बल पर किया सनातन धर्म की सुरक्षा- शंकराचार्य वासुदेवानंद

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। नौ दिवसीय आराधना महोत्सव में आयोजित श्रीमद्भगवत कथा में अपने आशीर्वचन में पूज्य श्रीमज्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी
वासुदेवानन्द सरस्वती जी ने बताया कि लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व सनातन वैदिक धर्म के वास्तविक सिद्धान्तों का दमन करके नास्तिक चार्वाक, का पालिकों एवं एकात्मवाद के
विरोधियों द्वारा बुद्धिवाद व विलासिता के मनमानी सिद्धान्तों का दोषपूर्ण प्रचार-प्रसार
किया जा रहा था। वैदिक संस्कृति लुप्त प्राय हो गई थी। सनातन धर्म पर आए ऐसे संकटकाल में भगवान आदिशंकराचार्य ने शस्त्र और शास्त्र के बल पर सनातन धर्म का संरक्षण एवं संवर्धन किया। इस कार्य में महाराजा सुधन्वा ने अपनी सेना द्वारा उनकी सहायता भी किया। पूज्य स्वामी जी ने भगवान आदिशंकराचार्य के बाद के दस
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्यों का आचार्य त्रोटक, विजय, कृष्ण, कुमार, गरुण,
शुक, विन्ध्य, विशाल, वकुल और वामन का परिचय कराया।
श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में ख्याति प्राप्त परमसंत कथा व्यास स्वामी श्रवणानंद महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न कथा प्रसंगों के द्वारा बताया कि ऋषियों एवं राजाओं की तपस्या साधना एवं लोकहितकारी धर्मप्राण शासन पद्धति से किस तरह सनातन धर्म के सहारे माया-मोह,काम-वासना, अहंकार से दूर रहकर पापमयी
कार्यों से विरत व पुण्यमयी कार्यों में संलग्न रहने की प्रेरणा मिलती है। मैदानेश्वर बाबा की दिव्य भव्य-सज्जा पूजा करके अभिषेकात्मक रुद्रयाग अनुष्ठान
किया गया।




