रामकथा में सीताहरण सुन भावुक हुए श्रोता

चित्रकूट ( अनुराग दर्शन समाचार )। बिहारा गांव के पेरातीर हनुमान मन्दिर में रामेश्वर भोलेनाथ मन्दिर में श्रीराम कथा के आठवें दिन आचार्य नवलेश दीक्षित ने अरण्य कांड व किष्किंधा कांड में वर्णित सीताहरण की कथा सुन श्रद्धालु भावुक हो गये।
शनिवार को आचार्य नवलेश दीक्षित ने कहा कि माता जानकी स्फटिकशिला पर बैठी थीं। इन्द्र के पुत्र जयंत ने भ्रमित होकर कउवा बनकर मां सीता के पैर में चोंच मार दिया। सीता ने पुत्र समझ क्षमा कर दिया। खून की धारा बहने पर भगवान राम ने जयंत पर तीर छोडा। जयंत भागा उसे तीनों लोक में शरण नहीं मिली। नारद की सलाह पर प्रभु राम की शरण में आया तो प्रभु राम ने एक आंख फोडकर क्षमा कर दिया। उन्होंने कथा को आगे बढाते हुए सूर्पनखा के नाक-कान काटने का वर्णन किया। खरदूषण वध के बाद सूर्पनखा के रावण के दरबार में पहुंचने का वर्णन किया। रावण ने सोंचा कि मंशा वाचा कर्म से तामसी हूं, भजन नहीं कर सकता हूं, लेकिन युद्ध कर सकता हूं। उसकी सदगति हो जायेगी। सोने का हिरन बन मारीच का प्रभुराम वध करते हैं। रावण सीता का हरण करता है। जटायु रक्षा को आगे आते हैं। राम कुटिया में सीता को न पाकर विलाप करने लगे। पशु-पक्षियों से पूंछने पर जटायु ने उन्हें सीताहरण की जानकारी दी। भगवान राम सुग्रीव के पास पहुंचते हैं। बाली का वध होता है। कथा में मुख्य यजमान की धर्मपत्नी हीरामणि व आयोजक भोलेनाथ शुक्ला, श्यामलाल द्विवेदी, रमाकान्त मिश्र, उदयभान द्विवेदी, विकास शुक्ला आदि मौजूद रहे।



