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अधूरी तैयारी के बीच शुरू हुआ कल्पवास

कई सेक्टरों में संपर्क मार्ग और सड़कें नहीं बनी सड़कों पर छाया रहा अंधेरा*

गंगा के जल बढ़ने से कई कैंप में घुसा पानी

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। संगम की रेती पर लगे माघ मेले का यह दूसरा स्नान पर्व पौष पूर्णिमा का है। प्रताग्राह की पवन धरती में बसने वाले तंबुओं के शहर में, गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में, श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। सुबह 02:45 मिनट के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी है। घाटों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। लोक कल्याण का यह पर्व पितरों की पूर्णिमा का पर्व है। पौष पूर्णिमा पर त्रिवेणी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है ।संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद लोग संगम तट पर दान पुण्य भी कर रहे हैं। ऐसी मान्यता है कि माघ मेला में 33 कोटि देवी देवता भी आज से प्रयागराज के पवन भूमि में पूरे एक माह तक संगम में वास करते हैं । गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम में श्रद्धालु स्नान कर आज से कल्पवास का संकल्प लेकर कल्पवास शुरू करेंगे। माघ मेले में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है । घाटों पर डीप बैरिकेडिंग की गई है कि एनडीआरएफ एसडीआरएफ के साथ-साथ जल पुलिस की तैनाती की गई है । ताकि कोई भी श्रद्धालु गहरे पानी में ना जा सके कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरीके से पालन कराया जा रहा है । मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जा रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती है । आने और जाने के लिए एकल मार्ग की व्यवस्था की गई है । ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई समस्या ना हो सके।
वही सेक्टर 1 और 2 में गंगा का पानी बढ़ जाने से कई कैंपों में पानी घुस गया जिससे कल्प वासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वही सड़कों पर लगी खंभों में स्ट्रीट लाइट न जलने से अंधेरा छाया हुआ है। तीर्थ यात्रियों को ठंड से बचने के लिए किसी भी चौराहे पर अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई है जिससे 30 यात्री ठंड से परेशान थे।

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