नशे के कारोबारी पर पुलिस मेहरबान, स्थानीय लोग परेशान
इलाहाबाद। खुल्दाबाद थाना क्षेत्र में भुसौली टोला स्थित हीरा कुशवाहा के खेत के समीप लंबे समय से अनिल नाम के एक व्यक्ति द्वारा बड़े पैमाने पर मादक पदार्थो की बिक्री का कारोबार चलाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद रिहायशी इलाके में चल रहा मादक पदार्थों के क्रय-विक्रय का यह धंधा बंद नहीं हो सका। मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि पुलिस कारोबारी से मिली हुई है और उससे मोटा पैसा वसूलती है।
स्थानीय लोगों के आरोपों की पुष्टि 3 दिन पहले हुई एक नाटकीय घटना ने कर दी। शनिवार को स्थानीय पुलिस के साथ सादे कपड़ों में कुछ लोग कारोबारी के घर पहुंचे। कारोबारी तो उनके हाथ नहीं लगा लेकिन पुलिस के लोग घर से दो बड़ी पेटियां अपने साथ ले गए और घरवालों से अनिल को थाने भेजने की बात कही लेकिन वह थाने नहीं गया बल्कि पुलिस टीम के जाने के बाद पूर्व की भांति अपने धंधे में जुट गया।
आसपास के लोगों ने तो यह भी बताया कि जिस वक्त पुलिस अनिल के घर पहुंची थी उस वक्त वह घर पर ही था लेकिन चौकी के सिपाहियों ने उसे हटने का इशारा कर दिया जिससे वह गायब हो गया। मामले को कैसे हजम किया गया यह तो साफ तौर पर नही ज्ञात हुआ लेकिन पुलिस द्वारा कोई भी कार्यवाही ना किए जाने से अनुमान लगाया जा सकता है कि कारोबारी और पुलिस के बीच क्या हुआ होगा।
आइए अब बताते हैं की पूरे मामले में पुलिस का क्या कहना रहा, उसने कैसे-कैसे तर्क दिए मामले को रफा-दफा करने के लिए। कारोबारी के घर दबिश देने और मादक पदार्थ पकड़े जाने की संबंध में जब इंस्पेक्टर खुल्दाबाद से बात की गई तो पहले उन्होंने क्राइम ब्रांच द्वारा कार्यवाही किए जाने की बात कही लेकिन कुछ देर बाद ही वह अपनी बात से पलट गए और कहने लगे कि अनिल के घर ड्रग इंस्पेक्टर गए थे उन्होंने ही कुछ सामान पकड़ा है लेकिन उसमें कुछ भी प्रतिबंधित नहीं है।
इंस्पेक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि पकड़ा गया माल उनके थाने पर है और इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर को रिपोर्ट भेजी जाएगी यदि उनकी जांच में कुछ गलत मिलता है तो कारोबारी पर कार्यवाही की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एविल आदि दवाइयां बरामद हुई हैं जो कोई भी व्यक्ति अपने घर रख सकता है। मामला मीडिया तक पहुंच जाने से ही शायद लिखा-पढ़ी की गई। इस मामले में क्षेत्राधिकारी नगर प्रथम से भी बात की गई तो उन्होंने क्राइम ब्रांच द्वारा दबिश दिए जाने की बात बताई और जानकारी कर मादक पदार्थ विक्रेता पर सख्त कार्रवाई करने की भी बात कही। दोनों पुलिस अधिकारियों का बयान अपने आप में काफी कुछ कहता है।
सवाल उठता है कि क्या कोई आम व्यक्ति बड़ी तादात में दवाइयां और सिरिंज आदि अपने घर में रख सकता है। यदि रख सकता है तो उसका उपयोग क्या है, इसे कहां खपाया जा रहा है इसका भी समुचित जवाब मिलना चाहिए। दूसरा सवाल यह है कि आखिर क्राइम ब्रांच के लोग या ड्रग इंस्पेक्टर कारोबारी के घर कैसे पहुंचे? कोई तो बात होगी? क्या स्थानीय लोग दिन-रात नशे का कारोबार होने की जो बात लंबे समय से कर रहे हैं वह गलत है? स्थानीय लोगों का तो यह भी कहना है कि दूर-दूर से दूसरे समुदायों के लोग भी नशे के लिए यहां आते हैं।
नशा करने के बाद कई बार मारपीट की भी नौबत आ जाती है जिससे हमेशा बड़ी घटना का खतरा बना रहता है। लोग घरों से निकलने में भी डरते हैं, सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और लड़कियों को होती है। नशेड़ी गलियों में जुए की फड़ भी जमाते हैं। कुछ खास दिनों में तो लाखों की फड़ बैठती है। पुलिस जानबूझकर अनजान बनी हुई है। लोगों ने यह भी बताया कि कारोबारी कुछ मादक पदार्थों को जमीन में छुपा कर रखता है।



