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प्रयागराज पंचकोशी यात्रा में तक्षकेश्वर नाथ मन्दिर व शूल टंकेश्वर महादेव,श्री वनखण्डी नाथ महादेव में हुआ दर्शन पूजन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) ।आज पंचकोसी यात्रा प्रयागराज के विभिन्न शिवालयों में दर्शन पूजा अर्चना करते हुए यात्रा का पहला पड़ाव

“शूल टंकेश्वर महादेव में पूजन दर्शन

ब्रिटिश संग्रहालय में बुंदेलखंड से प्राप्त 12 वी शताब्दी के प्रयाग पत्र के अनुसार प्रयाग वट वृक्ष के नीचे स्थित त्रिशूलयुक्त शिवलिंग शूल टंकेश्वर कहलाये गये ,शूल टंकेश्वर महादेव का उल्लेख स्कन्द-पुराण के काशी खण्ड में मिलता है जिसमें कहा गया है कि प्रयाग के शूल टंकेश्वर महादेव मन्दिर को वाराणसी में दश्वमेधघाट के समीप से प्रयाग घाट पर प्रतिस्थापित किया गया ,कालान्तर में शूल टंकेश्वर महादेव मन्दिर की स्थापना किले के सामने यमुना के दाये तट पर अरैल में सुधिजनो ने किया 18 वी शताब्दी में सुर्खी चूने का बना छोटा सा मन्दिर काल‌ प्रवाह में देख देख के अभाव में नष्ट हो गया ,लगभग 40 वर्ष पूर्व शूलटंकेश्वर महादेव जी दो पीपल वृक्ष के बीच में उत्तर की ओर वर्तमान स्थल पर पुर्नस्थापित हो गये”

श्री वनखण्डी नाथ महादेव में दर्शन पूजन

तीर्थराज प्रयाग के प्रमुख शिवालयों में से एक बनखण्डी महादेव प्रमुख हैं इनके दर्शन से समस्त कष्टों से मुक्ति और मनोरथ पूर्ण होते हैं ”

तक्षकेश्वर नाथ मन्दिर में दर्शन पूजन हुआ

“वैदिक परम्परा के अनुसार श्री तक्षक तीर्थ सृष्टि के आदिकाल से ही पौराणिक गणनानुसार 20 लाख वर्ष से अधिक प्राचीन है इनका उल्लेख पदम् पुराण के 82 पाताल खण्ड में प्रयाग महात्म्य में 82 वे अध्याय में मिलता है मन्दिर में स्थापित पांचों लिंग आदिकालीन है राजा परिक्षित के पुत्र जन्मेजय के नाग यज्ञ में ब्रह्माणो द्वारा आहुति दान मांगने श्री तक्षक ने यह वचन दिया कि जो कोई तक्षक कुण्ड में स्नान कर इस स्थान पर पूजन दर्शन करेगा उसके कुल में कभी विष बाधा नहीं होगी ,शास्त्रो में भी कहा गया है कि कालसर्प योग शान्ति ,राहु की महादशा,नाग दोष एवं विष बाधा‌ से मुक्ति का मुख्य स्थान तक्षकेश्वर नाथ प्रयाग है ” सायंकाल संगम तट पर आचमनी लेकर यात्रा विश्राम हुआ ,यात्रा की अध्यक्षता श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के अन्तर्राष्ट्रीय सभापति श्रीमहन्त प्रेम गिरि जी महाराज ने‌ किया ,जगद् गुरू शंकराचार्य काशी सुमेरु पीठ स्वामी नरेंद्रानन्द‌ सरस्वती जी महाराज ,वेणी माधव के महन्त महामण्डलेश्वर साध्वी वैभव गिरि जी महाराज ,अन्तर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहन्त नारायण गिरि जी महाराज दूधेश्वर पीठाधीश्वर गाजियाबाद,अन्तर्राष्ट्रीय सचिव श्रीमहन्त महेश पुरी जी महाराज, अन्तर्राष्ट्रीय सचिव श्रीमहन्त शैलेन्द्र गिरि जी महाराज, अन्तर्राष्ट्रीय सचिव श्रीमहन्त मोहन भारती जी महाराज निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहन्त ओमकार गिरि जी महाराज, सचिव श्रीमहन्त राधे गिरि जी महाराज, नया उदासीन अखाड़े के जटार मुनी जी महाराज ,मंत्री श्रीमहन्त राम गिरि जी महाराज,मंत्री चेतन पुरी प्रयागराज महन्त आनन्ददेव गिरि जी कल्याण मुम्बई ,श्रीमहन्त आनन्द पुरी जी आवाहन अखाड़,अग्नि अखाड़ा के अखाड़ा परिषद के सन्तों की भी उपस्थिति रही । अन्य सन्तों की उपस्थिति में पी एन द्विवेदी लक्ष्मीकान्त मिश्र, मुन्नीलाल पाण्डेय,चण्डिका प्रसाद , मेला प्रशासन, पुलिस प्रसासन जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी पूजन में भाग लिया ,संगम पूजन की सम्पूर्ण व्यवस्था राज्य सरकार के दिशा-निर्देश से प्रयाग राज मेला प्रशासन की ओर से किया गया , सम्पूर्ण यात्रा में पुलिस प्रशासन का विशेष सहयोग रहा ।

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