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सन्त सम्मेलन का उद्देश्य हिन्दू राष्ट्र के निर्माण में संतों की भूमिका तय करना- स्वामी आनन्द स्वरूप

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। संगम किनारे आयोजित सन्त सम्मेलन के लिए तैयारियां जोर शोर से चालू हैं । यहां महावीर मार्ग पर स्थित ब्रह्मर्षि आश्रम में यह आयोजन कल 29 जनवरी को हो रहा है। धर्म संसद के संयोजक स्वामी आनन्द स्वरूप जी महाराज के नेतृत्व में सन्त सम्मेलन का निमंत्रण आज कई संतों को दिया । सन्तों को राष्ट्र और धर्म की वास्तविक स्थिति और वर्तमान परिस्थितियों से परिचित करवाया गया। स्वामी आनन्द स्वरूप ने कहा कि इस सन्त सम्मेलन का उद्देश्य हिन्दू राष्ट्र के निर्माण में संतों की भूमिका तय करना है । संपूर्ण विश्व में मानवता की रक्षा एवम् पुनर्स्थापना के लिए अब संतों को आगे आना होगा । सन्त समाज को यह तय करना होगा कि समाज कैसे जागृत होकर भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना करनी होगी और भारत पुनः विश्व गुरू बने । धर्म संसद के अध्यक्ष स्वामी प्रबोधनंद जी ने बताया कि आज सम्पूर्ण विश्व को इस्लामिक जिहाद से मुक्ति के लिए एकरूप होकर कार्य करना चाहिए । धर्म संसद संचालन समिति के सदस्य स्वामी सागर सिंधुराज जी ने भारत में हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर बोलते हुए कहा कि देश को डेमोग्राफी बदल रही है और मुस्लिम एक योजना के तहत अपनी जनसंख्या बढ़ा रहे हैं । उन्होंने कहा कि लोकतन्त्र में जनसंख्या ही राष्ट्र के नेतृत्व की गणना करती है। धर्म संसद के सदस्य स्वामी विनोद महाराज जी ने कहा कि अब हिंदुओं को चारों आश्रमों का पालन करते हुए गृहस्थ जीवन के पश्चात वानप्रस्थ आश्रम और सन्यास ग्रहण करना चाहिए। सन्तों को आमंत्रण देने हेतु स्वामी ताड़केशरण जी महाराज व राष्ट्रीय कोतवाल बाबा भैरवनाथ जी , गोविंद पाण्डेय, राघव ठकराल , कृष्ण तिवारी आदि सम्मिलित रहे ।

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