रोस्टर घोटाले में रेलवे प्रशासन ने की बड़ी कार्रवाई…
रेलवे प्रशासन ने सीआईटी लाइन वीके सिंह को एक महीने पहले ही जबरन रिटायर किया
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर रेलवे के प्रयागराज मंडल में हुए रोस्टर घोटाले में रेलवे प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। संगठित तरीके से किए गए इस अपराध के मामले में रेलवे प्रशासन ने सीआईटी लाइन वीके सिंह को एक महीने पहले ही जबरन रिटायर कर दिया। रेल प्रशासन की इस कार्रवाई से मुख्य आरोपी एसके पांडे के मामले में न्यूनतम सजा देने के फैसले पर अब सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रयागराज मंडल के वाणिज्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक रेलवे प्रशासन ने सीआईडी लाइन रहे पी के सिंह को जिनकी सेवानिवृत्त 28 फरवरी को होनी थी। उन्हें जनवरी महीने के अंतिम दिन उन्हें जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया है। रेल प्रशासन की इस कार्रवाई की टिकट चेकिंग स्टाफ में खूब चर्चा भी है। साथ ही सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं कि सीआईटी रोस्टर रहे एसके पांडे के मामले में रेलवे प्रशासन ने लचर और मिली भगत का स्टैंड किया है। एस के पांडे के खिलाफ सिर्फ एक ग्रेड कम करने, वह भी केवल एक वर्ष के लिए, जैसी दिखावे वाली कार्रवाई की गई है।
गौरतलब है कि इस मामले में एस के पांडे ही मुख्य आरोपी रहे। उनके खिलाफ तमाम आरोप साबित हुए हैं। इन आरोपों में ड्यूटी में हेरफेर करने के बदले टिकट चेकिंग स्टाफ से खाते में पैसा लेने, एक ही ट्रेन में लगातार ड्यूटी देने, बिना ड्यूटी पर आए टिकट चेकिंग स्टाफ की हाजिरी लगाने, हाजिरी रजिस्टर में सफेदा लगाकर गड़बड़ी करने जैसे तमाम गंभीर अपराध है। आश्चर्य यह है कि जबरन सेवानिवृत्त किए गए वीके सिंह पर एसके पांडे के अपराधों पर चुप्पी लगाने जैसा मामला है।इसी मामले में एनसीआर के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक रहे एमएन ओझा के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है। उन्हें उत्तर मध्य रेलवे से कोलकाता भेज दिया गया है। मुख्य आरोपी एसके पांडे को ओझा का करीबी माना जाता था।
बता दें कि रेलवे इस प्रकरण की अधूरी जांच कराया है। सिविल लाइंस के एक जनरल स्टोर के खाते से जोनल अफसर को पैसा भेजने, घरेलू सामग्री भेजने, कोरोना महामारी के दौरान बिना नौकरी पर आए हाजिरी लगाने वाले कर्मचारियों के मोबाइल की लोकेशन की भी जांच नहीं की गई। जो अभी भी इस घोटाले में कई जांच पर से पर्दा हटा लिया गया है जिसकी जांच होने की आवश्यकता है । यह जांचे होने पर कई नामों के उजागर होंगे साथ ही सवा सौ टीटीई जांच के दायरे में है।


