स्वस्थ वातावरण में ही जीवन रहेगा सुरक्षित: महामंडलेश्वर मनोहर पुरी

कोरोना जैसी महामारी से बचाव को पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक : शंकराचाय
र्पीपल,नीम और तुलसी के पेड़ लगाने से विषाणु जनित रोग होंगे दूर : विधायक छत्रपति
पीपल स्वयं में अस्पताल व धर्मशाला : डा0 धर्मेन्द्र कुमार
जगद्गुरु शंकराचार्य के माघ मेला शिविर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन
(अनुराग शुक्ला) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज ने गुरुवार को यहां कहा कि कोरोना जैसी महामारियों से बचाव के लिए पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत भूमि में विदेशी पेड़ नहीं बल्कि वैदिक वृक्षों का रोपण़ होना चाहिए।माघ मेला स्थित शंकराचार्य शिविर में आज आयोजित पर्यावरण संरक्षण संगोष्ठी में जगद्गुरु अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज ने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में अनादि काल से सांस्कृतिक, धार्मिक और वैचारिक मंथन होता रहा है। आज जब पूरी दुनिया कोरोना जैसी महामारी के नाम से कंपित हो रही है। ऐसे समय पर हमें पुनः वैदिक व्यवस्था की तरफ उन्मुख होना होगा। जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि वैदिक सूत्रों में अंधकार से प्रकाश और मृत्यु से अमरता की तरफ जाने की व्यवस्था है। वैदिक ग्रंथ हमें धर्मानुशासन में रहकर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का पाठ सिखाते हैं। यदि हम पेड़, पौधों, नदियों जैसे प्रकृति के विभिन्न अवयवों के साथ छेड़खानी करेंगे तो तमाम व्यधियां हमें नष्ट करने को आएंगी।
शंकराचार्य देव तीर्थ ने कहा कि दैहिक, दैविक और भौतिक ताप से निजात पाने के लिए हमें पेड़-पौधों और प्रकृति के अन्य स्वरुपों को संरक्षित करना होगा। इस अवसर पर उन्होंने विदेशी पेड़ों से भी लोगों को सावधान रहने को कहा। जगद्गुरु ने कहा कि विदेशों से आये कटीले वृक्ष हमारे पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने नीम, पीपल, अशोक और तुलसी जैसे वैदिक वृक्षों के रोपण और संरक्षण पर अधिक बल दिया। जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी मनोहरपुरी जी महाराज ने भी अपने संबोधन में वातारण को स्वस्थ रखने के लिए पर्यावरण के संरक्षण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब वातावरण स्वस्थ रहेगा तो हमारा स्वास्थ्य भी संरक्षित रहेगा। महामारी से बचाव के लिए उन्होंने भी अधिक से अधिक वृक्षों को लगाने की वकालत की। ब्रह्म स्वरुप ब्रह्मचारी जी महाराज ने भी पर्यावरण संरक्षण पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के मूल में ही वृक्ष निवास करते हैं। बिहार प्रदेश के खगड़िया सदर से विधायक छत्रपति यादव ने इस अवसर पर कहा कि पीपल, नीम और तुलसी के पेड़ लगाने से विषाणु जनित रोग स्वतः दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मानव ही नहीं बल्कि धरती के सभी जीव-जन्तुओं के उत्तम स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक है। पीपल-नीम-तुलसी अभियान के संस्थापक डा0 धर्मेन्द्र कुमार ने संगोष्ठी में कहा कि पीपल, नीम और तुलसी स्वयं में अस्पताल और धर्मशाला हैं। इनका उपयोग तमाम रोगों से निदान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि पीपल के पेड़ तमाम जीव-जन्तुओं और पक्षियों के आवास हैं। इसलिए इन वृक्षों के रोपण से न केवल पर्यावरण शुद्ध होगा बल्कि लोगों को कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलेगी। साथ ही पक्षियों और अन्य जीव जन्तुओं को रहने की प्राकृतिक धर्मशाला उपलब्ध होगी। बिहार के रहने वाले डा0 धर्मेन्द्र कुमार पिछले करीब 30 वर्ष से देश भर में पीपल नीम-तुलसी अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के तहत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और नेपाल के कई नगरों में अब तक सैकड़ों संगोष्ठियां आयोजित कर उन्होंने जनजागरण किया है। इस दौरान उन्होंने दस हजार से अधिक पीपल, नीम और तुलसी के पौधों का भी उन्होंने वितरण किया है। संगोष्ठी में हाथी अखाड़ा जगन्नाथपुरी के श्रीमहंत सुखराम दास, रामानुज संप्रदाय के संत और मांडव पीठ चित्रकूट के स्वामी लक्ष्मणाचार्य, महामंडलेश्वर झंडा बाबा, बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नागेन्द्र कुमार विकल, जल संरक्षण पर कार्य करने वाले आर्य शेखर, इंजीनियर रवि कुमार, इंजीनियर युवराज यादव, शम्भू प्रसाद यादव और योगेंद्र प्रसाद समेत तमाम पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।



