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धर्म से ही राष्ट्र पुष्पित, पल्लवित एवं सुरक्षित: शंकराचार्य नरेन्द्रानंद

जातिवाद का विष बोना मतलब अराजकता का निर्माण करना: जगद्गुरू

लाखों क्रांतिकारियों का इतिहास स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। किसी भी राष्ट्र में रहने वाले व्यक्ति का धर्म सर्वस्व होता है। क्योंकि धर्म प्रबल एवं प्रचंड होता है। धर्म से ही नियंत्रित राजनीति होनी चाहिए। लेकिन आज राजनीति में धर्म घुस गया है,जो राष्ट्र के विकास में बाधक है। धर्म से ही राष्ट्र पुष्पित एवं पल्लवित होता है। इसलिए राष्ट्र सर्वोपरि है। यदि राष्ट्र भक्ति है तो धर्म भी सुरक्षित है।यह बातें माघ मेला में काशी सुमेरूपीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य नरेन्द्रानंद सरस्वती ने गुरूवार को अपने शिविर में कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का सर्वस्व दान कर दिया। राष्ट्र के लिए भगवान राम ने राज्य छोड़ दिया। भगवान कृष्ण दुश्मनों से लड़ते हुए अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए समुद्र में अपनी चौकियां बनवाये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद का मतलब जातिवाद नहीं होता है। इसका मतलब गृहवासी, वनवासी, आदिवासी, चारों वर्ण को एक सूत्र में बांधकर चलना है। जातिवाद का विष बोना मतलब अराजकता का निर्माण करना है। लेकिन भारत का संविधान जातिवाद को प्रोत्साहित करता है, पुष्पित व पल्लवित करता है। सनातन धर्म में जाति कर्म से बदली जा सकती है। लेकिन संविधान में जाति नहीं बदली जा सकती। इसलिए जातिवाद को सबसे ज्यादा प्रोत्साहन संविधान करता है। ऐसी कड़ी में संशोधन परिष्कृत करना चाहिए। तभी राष्ट्र विकास की ओर अग्रसर होगा।
शंकराचार्य ने आगे कहा कि राष्ट्र की एकता व अखंडता के लिए क्रांतिकारियों का जो योगदान रहा है, उसे पढ़ाया जाना चाहिए। शिवाजी, धर्मदास, महाराणा प्रताप, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, मंगल पाण्डेय जैसे लाखों क्रांतिकारियों का इतिहास न पढ़ाया जाता है न बताया जाता है। जब तक इनका इतिहास नहीं बताया जायेगा, तो कौन इन्हें जानेगा और प्रेरणा कैसे मिलेगी। इनके बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में हर विद्यार्थी को सैनिक शिक्षा भी दी जानी चाहिए। हर व्यक्ति सैनिक होगा तभी वह राष्ट्र के लिए लड़ने में सक्षम होगा और देश सुरक्षित रहेगा।
जगद्गुरू शंकराचार्य ने कहा कि हमारे देश में त्रिभाषा संस्कृत, हिन्दी एवं क्षेत्रीय भाषा का होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए एक समान होना चाहिए। वर्तमान में 275 संवैधानिक कानून ऐसे हैं जो बेकार हो चुके हैं। कहा कि इस पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिकल 29 व 30 को समाप्त करना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि गीता सभी को पढ़नी चाहिए, यदि वह पढ़ेगा तो देश के साथ गद्दारी कभी नहीं करेगा।

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