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मेरे रक्त में फ़ौजी पिता का ही रक्त बह रहा है- महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरी

कारगिल में जान न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को नमन

(अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। आज किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी टीना मा ले कारगिल के विजय ऑपरेशन का समापन आज के दिन हुआ हमारे देश के दुश्मन पाकिस्तान के द्वारा पीठ में ख़ंजर भौंके जाने की बात सामने आने पर हर भारतीय की तरह मेरी भी रगो में सरसराहट दौड़ गई ,मन और मस्तिष्क में एक ही बात घर कर गई कि बदला,ग़द्दारी का बदला लेना है। हरहाल में सबक़ सिखाना है। भारतीय सेना की फ़ौलादी बाजुओं की शक्ति का अहसास करवाना है । महामंडलेश्वर कौशल्या आनंद गिरि ने कहा क्यों न मेरे भी रक्त में फ़ौजी पिता का ही रक्त बह रहा है। जिन्होंने भारत चीन युद्ध में अपने पेट पर गोली खाई थी। और जिनके घाव आज भी गरवीला एहसास करवाते हैं। जिनके बुजुर्ग शरीर में आज भी युद्ध के नाम पर बिजली सी कौंध जाती है और सीमा पर जाने को आतुर हो जाते हैं उन्हीं वीर पिता की मैं संतान हूँ । महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी ने कहा
कारगिल विजय युद्ध मेरे जन्म के बाद हुई भीषण लड़ाइयों में एक है। इसी लिए मेरे जीवन मे इसका विशेष स्थान है। कारगिल युद्ध जो विश्व के सबसे ऊँचे स्थानों पर तापमान से – 40,50 डिग्री पर लड़ा गया था। इस युद्ध ने पाकिस्तानीयों को वीरता का एैसा पाठ पढ़ाया जो उन्हें 7 पुस्तों तक याद दिलाता रहेगा। इस युद्ध में वीरता की कोई एक कहानी तो है नहीं जिसका वर्णन मैं करूँ एक से एक वीरता की प्रेरणा दायक कहानियाँ हैं। महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरी ने कहा कारगिल में जान न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को नमन करते हुए समस्त देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की शुभकामनाएँ देती हूँ।

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