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निरीक्षक संस्कृत पाठशाला के कार्यालय में गजब का भ्रष्टाचार

प्रयागराज( अनुराग दर्शन समाचार )। छह माह का कारावास और पांच लाख के जुर्माना से दण्डित व्यक्ति एसआरएन के पास स्थित संस्कृत पाठशालाएं उत्तर प्रदेश के कार्यालय में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत है। न्यायालय एवं सरकारी नियमों को ताख पर रख कर उसे वेतन दिया जा रहा है। इतना ही नहीं उस कार्यालय में लगी फिंगर प्रिंट मशीन भी गायब है। और महीने में एकाध बार आकर हाजिरी लगा दी जाती है।
बता दें कि निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं का कार्यालय स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के ठीक सामने स्थित है। उक्त कार्यालय में निरीक्षक के पद पर रनवीर सिंह कार्यरत हैं। इन्ही के कार्यालय में प्रधान सहायक के पद पर महेन्द्र सिंह कार्यरत है। वह ड्यूटी कैसे करते है यह तो उनके विभाग के लोग ही बता सकतें हैं। इस कार्यालय में लगी फिंगर प्रिंट मशीन खराब हो चुकी है। वहां कार्यरत कर्मचारी मैनुवल हस्ताक्षर करते हैं। सूत्रों की माने तो महेन्द्र सिंह अधिकतर कार्यालय में ड्यूटी नहीं करता, वह महीने में एक बार आता है और पूरे महीने भर का हस्ताक्षर करके चला जाता है। यही हाल निरीक्षक का भी है।
संस्कृत पाठशालाएं के प्रधान सहायक महेन्द्र सिंह को एन.आई. एक्ट के तहत अतिरिक्त न्यायालय कोर्ट संख्य दो ने 28 जनवरी 2021 को छह माह के कारावास की सजा एवं पांच लाख रूपये से दण्डित किया है। यदि जुर्माना न जमा किया गया तो उसे तीन माह और कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी। इतना ही नहीं 15 जनवरी 2020 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 8 इलाहाबाद आलोक कुमार श्रीवास्तव ने भी उक्त आदेश को सही मानते हुए उक्त दोष पर की गई सजा को भुगतने का निर्देश दिया है। सबसे अहम बात यह है कि सरकारी नौकरी के नियमों को यदि अधिकारी आधार मानते तो उसे निलम्बित कर देते। सरकारी नियमों में यह उल्लेख है कि यदि विभाग दोषी को नौकरी से नहीं निकालता है तो वह न्यायालय के आदेश के दिनाॅक बाद से स्वतः निलम्बित माना जायेगा। सजा काटना तो दूर की बात रही। आरोपित महेन्द्र सिंह अब तक न्यायालय का जुर्माना भी नहीं भरा। उक्त विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बावजूद आदेश का इन्तजार कर रहें है। जबकि इस सम्बन्ध में सूचना दे दी गई है।
निरीक्षक संस्कृत पाठशालाएं उत्तर प्रदेश रनवीर सिंह का कहना है कि मुझे इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उसे न्यायालय ने सजा दिया है। इतना ही नहीं रनवीर सिंह ने बताया कि दोषी महेन्द्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मेरे पास नहीं है।

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