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शिवरात्रि का अर्थ है, “प्रकाश देने वाली रात्रि “: महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। वर्तमान परिदृश्य में जिस तरह भौतिकवाद के साथ आतंकवाद और भोगवाद बढ़ रहा है, नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है, पूरे विश्व की हलचल में लोग अपनी शाश्वत दैवीय सम्पदा को तथा आध्यात्मिक धरोहर को छोड़ते जा रहे है,यह एक गंभीर चिंतन का विषय है। सभी धर्म मनुष्य-आत्मा के कल्याण की चेष्टा करते है तथा कल्याण का ही मार्ग प्रशस्त करते है परन्तु विडंबना यह है की सभी धर्म-प्रचारक, सुधारक, दार्शनिक अथवा धर्म के क्षेत्र में अग्रगणी सभी नेतागण एकजुट हो कर एक स्वर से मानव को नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की धारणा के लिए खुल कर नहीं कहते। ऐसे में सभी धर्मो में व विभिन्न भाषाओ में परमपिता परमात्मा ’शिव’,जो की एक ज्योतिबिंदु स्वरुप व निराकार है को अलग अलग नामों से जैसे ईश्वर, अल्लाह, गॉड, एक ओंकार, जेहोवाह इत्यादि नामों से जाना जाता है। ईश्वर के सत्य परिचय के रूप में जहा हिन्दू धर्म में ज्योति बिंदु का यादगार ज्योतिर्लिंग दिखते है, इस्लाम धर्म में अल्लाह को- ’नूर-ए-इलाही’ कहते है, वही ईसाई धर्म में ’ गॉड इज़ लाइट’ और सिख धर्म में ’ एक ओंकार निराकार’ कहा जाता है। महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी ने कहा हम बदलेंगे तो जग बदलेगा । इसी लक्ष्य के लिए अपने को नकारात्मक संकल्पो और रूणीवादी मान्यताओं को त्याग कर सत्य पिता परमात्मा को पहचान कर परमपिता परमात्मा के महान कार्य- विश्व परिवर्तन में सहयोगी बन रहे है। महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक रहस्य है की इस दिन कलयुगी रुपी रात्रि में परमपिता परमात्मा शिव इस धरती ख़ास भारत में अवतरित होते है। महामंडलेश्वर कौशल्या नंदगिरी ने कहा इस दिन भक्त शिव पर अक का फूल, धतूरा, जल अथवा दूध चढ़ाते है जो की यादगार है की हम सभी को अपने अंदर की बुराइया, कमज़ोरिया अदि की बलि व विकारो का दान दे के शिव से मुक्ति और जीवनमुक्ति बदले में लेना है। इस दिन उपवास रखने का आशय है की हमे ज्योति बिंदु स्वरुप परमात्मा की याद में रहके अपने को पूर्व-जन्मो के विकर्मो से मुक्त करना है। शिवरात्रि का अर्थ है- “प्रकाश देने वाली रात्रि “, अगर हमारे अंदर किसी भी प्रकार का विकार है तो अंधकार कहेंगे, रोशनी नही। रोशनी अर्थात सम्पूर्ण पवित्रता।

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