इंटरनेट डेस्क। हिन्दी भवन, गाजियाबाद में अखिल भारतीय संत परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय धर्म संसद के द्वितीय दिवस का सत्र भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ जी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई ।

धर्म संसद में काशी सुमेरु पीठाधीश्वर यति सम्राट अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने घोषणा की कि सनातन धर्म एवम् संस्कृति के संरक्षण एवम् संवर्धन के लिए राजनैतिक संसद की तरह सनातन धर्मावलम्बियों की संसद आवश्यक है, जिसमें भारत के प्रत्येक जिले से किसी एक योग्य सन्त को सांसद मनोनीत किया जायेगा ।

धर्म संसद का सत्र वर्ष में कम से कम 3-4 बार निश्चित रूप से आयोजित होगा । धर्म संसद में सनातन धर्म की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा होगी, और धर्म संसद में पारित प्रस्ताव को भारत की राजनैतिक संसद को कार्यवाही के लिए भेजा जाएगा ।

पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य जी महाराज की घोषणा का धर्म संसद ने स्वागत किया।
इस विषय पर अपने विचार ब्यक्त करते हुए स्वामी सर्वानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मैं धर्म संसद के लिए 2अरब रूपये एवम् धर्म संसद भवन मैं उपलब्ध करने की घोषणा करता हूँ ।
आज धर्म संसद के द्वितीय दिवस के सत्र की अध्यक्षता कर रहे भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानन्द तीर्थ जी महाराज ने धर्म संसद के सभी सांसदों को एक-एक गाड़ी और धर्म संसद के विस्तार के लिए 1 करोड़ रूपया देने की घोषणा की, एवम् कहा कि धर्म संसद के कैबिनेट का पूरा स्वरूप तो शीघ्र घोषित किया जायेगा, किन्तु आज की इस धर्म सभा के अध्यक्ष के नाते मैं डासना महाकाली मन्दिर के महन्त स्वामी नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज को प्रस्तावित धर्म संसद के मन्त्रिमण्डल का रक्षामन्त्री मनोनीत किये जाने की घोषणा करता हूँ, जिसका धर्म संसद में उपस्थित सभी सन्तों एवम् सनातन धर्मावलम्बियों ने अनुमोदन किया ।
धर्म संसद नें 10 करोड़ नव युवकों को देश के विभिन्न मन्दिरों में अस्त्र-शस्त्र का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है, जिनकी नियुक्ति धर्म संसद के सेना के रूप में की जायेगी ।
धर्म सभा को छद्म धर्माचार्य उन्मूलन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी बृज भूषण दास जी महाराज निर्वाणी अखाड़ा, महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी विवेकानन्द सरस्वती जी महाराज, गुरू माँ मुनीश्वरी गिरि जी महाराज जूना अखाड़ा, महामण्डलेश्वर स्वामी प्रज्ञा नन्द गिरि जी महाराज आवाहन अखाड़ा, महामण्डलेश्वर अनुभूतानन्द गिरि जी महाराज निरंजनी अखाड़ा, महामण्डलेश्वर स्वामी नवल किशोर दास जी महाराज पंच रामानन्दी निर्मोही अखाड़ा, स्वामी दीपांकर जी महाराज आनन्द अखाड़ा, स्वामी भौकाल पुरी जी महाराज महानिर्वाणी अखाड़ा, स्वामी सत्यानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज अग्नि अखाड़ा, स्वामी शिव नारायण गिरि जी महाराज एवम् स्वामी परमेश्वरानन्द गिरि जी महाराज जूना अखाड़ा, महामण्डलेश्वर स्वामी हरिओम गिरि जी महाराज, महन्त स्वामी सत्यब्रता नन्द सरस्वती जी महाराज जूना अखाड़ा ने भी सम्बोधित किया। धर्म संसद में कई अखाड़ों के महन्त एवम् महामण्डलेश्वर उपस्थित थे |
धर्म संसद का संचालन स्वामी नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने किया |

